जासं, बठिडा : मई माह में ही सूरज ने आग उगलनी शुरू कर दी है। इस समय भीषण गर्मी का लोग सामना कर रहे हैं। तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक पहुंच गया है। दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे तापमान से सबसे ज्यादा परेशानी मासूम बच्चों को उठानी पड़ रही है। भीषण गर्मी में बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी छोटे बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। भीषण गर्मी में उल्टी, दस्त सहित मलेरिया केस सामने आ रहे हैं। इसलिए बच्चों का गर्मी में विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। डाक्टरों की मानें तो तेज गर्मी के कारण बच्चों में पानी की कमी हो रही है, जिससे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। गर्मी की वजह से बच्चों में डायरिया बुखार आदि की समस्या हो रही है। बच्चों में बार-बार डायरिया की परेशानी की वजह से उनमें कुपोषण का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए अपने मासूम बच्चों की सेहत का विशेष रूप से ध्यान रखने की जरूरत है। डाक्टरों के मुताबिक गर्मी में बच्चों को बाहर ले जानें से बचें। बुखार, उल्टी या दस्त होने पर किसी नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं या फिर निजी डाक्टर को दिखाकर बच्चे का उपचार करवाएं। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाएं

गर्मियों में बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए सिविल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा रविकांत गुप्ता ने बताया कि इन दिनों उनके पास इन दिनों गर्मी से बुखार, उल्टी, दस्त से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। इसलिए वह सभी बच्चों के माता-पिता को अपने बच्चों को धूप में खेलने से रोकने, जिससे कि उनके अंदर पानी की कमी न हो और लू भी न लग पाए। इसके साथ ही बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाएं हो सके तो ओआरएस का घोल के साथ नारियल पानी या जूस भी पिलाने की सलाह दे रहे हैं। इतना ही नहीं डायरिया से बचाव के लिए बच्चों को बाहर के कटे हुए फल ना खिलाए और उन्हें बाहर का खाना खाने से भी रोकना चाहिए। डा. गुप्ता ने बताया कि गर्मी बढ़ने की वजह से मच्छर भी काफी ज्यादा हो गए हैं। उनसे अपने बच्चों का बचाव करें जिससे बच्चों को मलेरिया या डेंगू से बचाव हो सके। जब भी बच्चे घर से बाहर निकले तो उन्हें पूरे ढके हुए कपड़े पहनाए। एसएमओ बोले-बचाव की एकमात्र उपाय

वूमेन एंड चिल्ड्रन अस्पताल के एसएमओ डा. सतीश जिदल ने बताया कि आजकल तेज गर्मी और लू का प्रकोप काफी बढ़ गया है। ऐसे मौसम में नवजात शिशु एवं बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और पाचन तंत्र कमजोर होता है। इसलिए वह बढ़े हुए तापमान में ज्यादा बीमार पड़ते हैं। अभिभावकों को बच्चों को लू से बचाने व भरपूर मात्रा में तरल पेय पिलाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओपीडी में आजकल निरंतर बीमार बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चों में हीट स्ट्रोक, दस्त, उल्टी, तेज बुखार, पेट दर्द आदि की समस्या काफी बढ़ गई है। इसका बचाव ही एकमात्र उपाय है। नवजात शिशु एवं 6 महीने से कम के शिशुओं को माताएं सिर्फ स्तनपान कराती रहें। यह सुनिश्चित करें कि हर 2 घंटे पर शिशु को सिर्फ मां का दूध पिलाया जाए। बड़े बच्चों को तरल पेय ओआरएस का घोल, नारियल पानी,छाछ, ताजा एवं हल्का सुपाच्य भोजन निरंतर अवधि पर देते रहें।

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