कोमल ह्रदय वाला व्यक्ति कभी दूसरों का बुरा नहीं चाहता- प्रभास मुनी जी महाराज
सुशिष्य प्रवचन भास्कर प्रभास मुनि जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कोमल हृदय वाला व्यक्ति कभी दूसरों का बुरा नहीं चाहता

संस, बठिडा : कपड़ा मार्केट में स्थित जैन सभा में जितेंद्र मुनि जी महाराज के सुशिष्य प्रवचन भास्कर प्रभास मुनि जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कोमल हृदय वाला व्यक्ति कभी दूसरों का बुरा नहीं चाहता। उन्होंने कहा की जिस तरह हम अपने लिए मंगल कामना करते हैं ठीक वैसी ही कामना अगर दूसरों के लिए करें तो वही मूल रूप में धर्म की परिभाषा है।
उन्होंने बताया की भगवान महावीर स्वामी से उनके शिष्य ने प्रश्न किया हे प्रभु धर्म क्या है, तो भगवान महावीर ने अपने शिष्य को उत्तर देते हुए कहा कि जीवन में छोटों के प्रति वात्सल्य व बड़ों के प्रति आदर होना, जीवन विनय से परिपूर्ण होना यही धर्म है। उन्होंने कहा की कहां क्या बोलना है, कहां चुप रहना है, यह व्यवहारिकता है। जिसने व्यवहारिकता को अपना लिया उसके जीवन में विनय का आना लाजमी है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने विनय के तीन अर्थ बताए है। नम्रता, अनुशासन और आचरण। जब मनुष्य के विचार अच्छे बनते है, तो उसके चेहरे पर तेज झलकता है। व्यवहार में विनय भाव आने से कर्मों का क्षय होता है और जीव आत्मा ऊपर उठती हुई मोक्ष मार्ग की और बढ़ती है। इसलिए हमें अपने जीवन में विनय भाव को अपनाना चाहिए।
आज की धर्म सभा में मानसा, कलांवली, गीदड़बाहा, सिरसा, चंडीगढ़, जैतो, धर्मकोट, फरीदकोट, मलोट, रामामंडी व मलेरकोटला से भी भक्तजन गुरुदर्शन के लिए पधारे थे।
सभा के अंत में महामंत्री उमेश जैन ने आये हुए सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत किया व सामाजिक सूचनाएं प्रदान की।
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