ईश्वर के प्रत्येक नाम में है विशेष तत्व
संवाद सहयोगी, ब¨ठडा: संघ प्रवर्तिनी जैन भारती सुशील कुमारी महाराज की सुशिष्या साध्वी शुभिता ने ध
संवाद सहयोगी, ब¨ठडा:
संघ प्रवर्तिनी जैन भारती सुशील कुमारी महाराज की सुशिष्या साध्वी शुभिता ने धर्म सभा में कहा कि ईश्वर का प्रत्येक नाम एक विशेष तत्व को प्रदर्शित करता है। ईश्वर के किसी विशेष नाम का जाप, हमें उस विशेष तत्व के माध्यम से लाभ प्रदान करता है। इसे विटामिन की गोली के उदाहरण से समझते हैं।
जैसे जब हम कोई विटामिन की गोली लेते हैं। तब हमें उसी विटामिन का लाभ मिलता है अर्थात हमारे शरीर में उस विटामिन का स्तर बढ़ता है। ये परिणाम मात्र उस गोली को निगलने से मिलते हैं चाहे हमने वह गोली उस पर विश्वास रखे बिना खाई हो। उसी प्रकार यदि हम ईश्वर का नामजप करेंगे तो हममें उस तत्व की वृद्धि होगी ही भले ही वह हमारे संस्कृति तथा धर्म के अनुरूप हो अथवा न हो। चाहे हम श्रद्धा सहित अथवा बिना श्रद्धा के नाम जप कर रहे हों।
वास्तव में अधिकांश लोगों का आध्यात्मिक स्तर 30 प्रतिशत से अल्प होता है। ईश्वर पर उनकी श्रद्धा 0-2 प्रतिशत होती है। इस प्रकरण में नामजप अतिअल्प अथवा बिना श्रद्धा के प्रारंभ होता है। इस नामजप से उन्हें सांसारिक लाभ के साथ विविध अनुभूतियां भी होती हैं जिसके परिणामस्वरूप उनमें अगले स्तर की श्रद्धा जागृत होती है। यद्यपि यदि कोई श्रद्धा के साथ नामजप करे तो उसे अनन्य लाभ होता है। एक कहावत है सांसारिक जीवन में पैसा ही सबकुछ है तथा आध्यात्मिक जीवन में श्रद्धा ही सबकुछ है। जब हम श्रद्धा के साथ नाम जप करते हैं जिस देवता तत्व(ईश्वर का तत्व) का हम नामजप करते हैं, उनकी शक्ति त्वरित सक्रिय हो जाती है। इसका प्रभाव दीर्घकालीन होता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि श्रद्धा के साथ किए जानेवाले नामजप से हमारी आध्यात्मिक प्रगति ईश्वरप्राप्ति की दिशा में होने लगती है।
ईश्वरप्राप्ति के उद्देश्य जाप में होती है आध्यात्मिक प्रगति
साध्वी ने बताया कि क्रिया के नियम के अनुसार हमारे प्रत्येक कृत्य का परिणाम होता ही है। यदि हम किसी निश्चित फल हेतु सांसारिक लाभ पाने के लिए नामजप करते हैं, तो एक सीमित मात्रा में पूर्वनिश्चित नामजप पूर्ण करने पर हमारी सांसारिक इच्छाएं पूरी होती हैं। यदि हम ईश्वरप्राप्ति के उद्देश्य से नामजप करते हैं तो इससे हमारी आध्यात्मिक प्रगति होती है। हमें भगवान महावीर तथा को निरंतर श्रद्धा के साथ श्रवण करना है ताकि हम एक नहीं अनेकों अनेकों लाभों को प्राप्त कर सकें।
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