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    392 वर्ष पुराना है प्राचीन 11 रूद्र शिव मंदिर भदौड़ का इतिहास

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 25 Jul 2022 07:35 AM (IST)

    प्राचीन शिव मंदिर बाग वाला में भगवान शिव भोलेनाथ से संबंधित 11 रूद्र स्थापित हैं।

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    392 वर्ष पुराना है प्राचीन 11 रूद्र शिव मंदिर भदौड़ का इतिहास

    हेमंत राजू, भदौड़ (बरनाला)

    प्राचीन शिव मंदिर बाग वाला में भगवान शिव भोलेनाथ से संबंधित 11 रूद्र स्थापित हैं। 392 वर्ष पुराने इस शिव मंदिर में की गई कलाकारी में आज भी उर्दू भाषा का विवरण है जो इसे पुरातन महत्व को दर्शाता है। --------------------

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    मंदिर का इतिहास

    इस मंदिर में दुनिया के हर तरह के फूल व फल थे। इसलिए इस मंदिर का नाम प्राचीन 11 रूद्र शिव मंदिर बाग वाला पड़ा। इस मंदिर का निर्माण 392 वर्ष पहले लाला नानूं मल्ल ने अपने घर संतान पैदा होने पर करवाया था। उस समय सवा माह हवन यज्ञ करवाए गए। उस समय 101 कपिला गाय दान दी गई थी। ----- मंदिर की विशेषता

    मंदिर के पुजारी बंसी दास ने बताया कि इस मंदिर के साथ के केवल तीन मंदिर हैं जोकि एक 11 रूद्र काशी में व दो मंदिर कस्बा भदौड़ में हैं। एक मंदिर प्राचीन 11 रूद्र शिव मंदिर बाग वाला व एक मंदिन प्राचीन 11 रूद्र शिव मंदिर पत्थरां वाली स्थित है। इन दोनों मंदिरों के दर्शन के लिए शिव भक्त दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर में एक सांपों का जोड़ा भी रहता है व कई भक्तों ने इस जोड़े को अब भी देखा है। जो भी भक्त इन दोनों मंदिरों में सच्चे मन से मन्नत मांगते हैं भगवान शिव भोलेनाथ उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। महाशिवरात्रि व सावन की शिवरात्रि विशेष तौर पर मनाई जाती है व कावड़िये यहा पर गंगाजल चढ़ाते हैं। -----------------

    सावन का दूसरा सोमवार आज,मंदिरों में शिवलिग पर होगा जलाभिषेक

    संवाद सूत्र, धनौला (बरनाला)

    सावन माह का दूसरा सोमवार आज है। जिले के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालु शिवलिग पर जलाभिषेक करके अपनी जीवन की मंगल कामना मांगेंगे। महा देव शिवशंकर भोले नाथ को खुश करने के लिए श्रद्धालु शिवलिग पर दूध,जल,गंगाजल,धतूरा,आक,दही,बिल पत्र,गन्ने का रस,फल,फूल आदि चढ़ाकर जलाभिषेक करेंगे।

    ज्योतिषाचार्य पंडित जानकी प्रसाद धनौला ने बताया कि भगवान शिव को अति प्रिय सावन के सोमवार के दिन व्रत रखने से दोहरा फल प्राप्त होता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार सावन के सोमवार के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को 16 व्रत रखने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।