अमृतसर [नितिन धीमान]। समलैंगिकता अब अपराध नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध बताने वाली धारा को खत्म कर दिया है। वर्ष 2005 में अमृतसर में समलैंगिक विवाह का अनूठा मामला सुर्खियों में रहा। यहां दो लड़कियों ने समलैंगिक विवाह रचाकर सभी को स्तब्ध कर दिया।

2005 में यहां समलैंगिकता लोगों के लिए नई चीज थी। अचानक हुए इस विवाह ने जहां समाज में खलबली मचा दी, वहीं शहर के कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने इसका विरोध भी किया। दूसरी तरफ दोनों लड़कियां समाज की उलाहनों, तानों से दूर अपना आशियाना सजा चुकी थीं।

दरअसल, अमृतसर के बटाला रोड क्षेत्र में रहने वाली दो लड़कियां सहेलियां थीं। इनकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि लोग उन्हें इक्क जिंद दो जान कहते थे। परिवार भी यही समझता रहा कि ये दोनों दोस्ती की नई परिभाषा लिखेंगी, पर किसे मालूम था कि एक दिन दोनों उस बंधन में बंध जाएंगी जो समाज को स्वीकार्य नहीं।

इनमें से एक की शक्ल सूरत व पहनावा लड़कों जैसा था। उसके चलने का अंदाजा, सिर पर टोपी पहनना संकेत देता था कि वह लड़का है। खास बात यह कि उसे अपनी सहेली की बहुत फिक्र थी। वह उसे अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देती थी।

वर्ष 2005 में दोनों घर से गायब हो गईं। दोनों दिल्ली पहुंचीं और यहां विवाह रचा लिया। शादी के बाद अमृतसर लौटीं तो परिवार और रिश्तेदारों के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिवार के तानों व उलाहनों के बाद दोनों ने घर-बार छोड़ दिया। दोनों किराए का कमरा लेकर रहने लगीं। इसके बाद दोनों ने बकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर अपने संंबंधों को सार्वजनिक किया।

तकरीबन डेढ़ साल के इस बाद अनूठे व अस्वीकार्य रिश्ते को नजर लग गई। इनमें से एक लड़की के किसी लड़के से प्रेम संबंध बन गए। बाद में लड़की ने अपने नए प्रेमी से शादी रचा ली। यह बात जब उसकी सहेली को पता चली तो वह आगबबूला हो गईं। उसने तब जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश भी की। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचा लिया। प्यार की यह अनूठी कहानी आज अतीत है। इनमें एक शादीशुदा जिंदगी जी रही है तो दूसरी के बारे में कोई जानकारी नहीं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt