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पावन स्वरूपों की छपाई पर रोक, अटकी पाकिस्तान के गुरुद्वारों की मांग; जत्थेदार बोले- पंजाब सरकार एक्ट वापस ले

Published: Mon, 19 Oct 2026 12:15 PM (IST)

श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की छपाई और वितरण पर रोक जारी है। अकाल तख्त जत्थेदार ने पाकिस्तान ...और पढ़ें

श्री अकाल तख्त साहिब जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज।

श्री अकाल तख्त साहिब जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज।

HighLights

  1. SGPC ने पंजाब सरकार के कानून के विरोध में छपाई रोकी।

  2. पाकिस्तान के गुरुद्वारों की 25 स्वरूपों की मांग अटकी।

  3. जत्थेदार ने पंजाब सरकार से कानून वापस लेने की मांग की।

जागरण संवाददाता, अमृतसर। पंजाब सरकार के 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कानून के विरोध में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों की छपाई और वितरण पर जो रोक लगाई थी, वह अब भी बरकरार है।

इसके चलते पाकिस्तान के विभिन्न गुरुद्वारों के लिए भेजी गई 25 पावन स्वरूपों की मांग भी पूरी नहीं हो पा रही है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार से मांग की है कि इस संवेदनशील मामले में आम सहमति बनने तक कानून से संबंधित अधिसूचना वापस ली जाए।

श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कानून के प्रविधान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने संशोधन करके अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है। उन्होंने पावन स्वरूपों के लिए विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आइडी) अनिवार्य करने और इससे संबंधित आंकड़े वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, इन शर्तों से सिख धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यों में बाधा आ रही है।

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सरकार को वापस लेना चाहिए एक्ट

जत्थेदार ने कहा कि जब तक इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों के बीच आम सहमति नहीं बनती, तब तक सरकार को अधिसूचना वापस लेनी चाहिए। साथ ही एसजीपीसी को अपनी पुरानी नियमावली और अभिलेख व्यवस्था के अनुसार पावन स्वरूपों का वितरण करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

एसजीपीसी की ओर से छपाई और वितरण की प्रक्रिया स्थगित किए जाने का असर पाकिस्तान के गुरुद्वारों पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने वहां के विभिन्न गुरुद्वारों के लिए 25 पावन स्वरूपों की मांग भेजी थी, लेकिन रोक के चलते यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। जत्थेदार के अनुसार, हाल के वर्षों में पुनर्निर्मित या बहाल किए गए करीब 17 अन्य गुरुद्वारे भी पावन स्वरूपों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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सरकार के साथ बातचीत रही बेनतीजा

जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बताया कि अकाल तख्त की ओर से निर्धारित समय-सीमा के अंतिम दिन सरकारी प्रतिनिधियों ने दो बार सचिवालय का दौरा किया था। इसके बावजूद विवाद के समाधान की दिशा में कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया गया। सरकार ने कानून की समीक्षा के लिए समिति गठित की है, लेकिन अकाल तख्त की ओर से बनाई गई विशेषज्ञ समिति के साथ अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

यह मामला उस समय फिर चर्चा में आया, जब आम आदमी पार्टी के विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा से जुड़े प्रकरण पर अपना पक्ष रखने के लिए पार्टी के विधायक अकाल तख्त सचिवालय पहुंचे थे। इस दौरान जत्थेदार ने विधायकों से पंजाब सरकार के समक्ष मुद्दा उठाने और विवाद का जल्द समाधान कराने को कहा।

गौरतलब है कि एसजीपीसी ने संशोधित कानून पर आपत्ति जताते हुए शुरुआत में एक महीने के लिए पावन स्वरूपों की छपाई और वितरण स्थगित किया था। बाद में इस रोक की अवधि बढ़ा दी गई। फिलहाल रोक जारी रहने से स्वरूपों की मांग और आपूर्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

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