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    अमृत छकाने वाली तस्वीर में गुरु साहिब के पैरों में जूते दिखाना सिख सिद्धांतों का उल्लंघन', एडवोकेट धामी ने जताई आपत्ति

    Updated: Tue, 11 Nov 2025 05:01 PM (IST)

    शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब सरकार द्वारा श्री आनंदपुर साहिब में भाई जैता जी की यादगार मे ...और पढ़ें

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    अमृत छकाने वाली तस्वीर में गुरु साहिब के पैरों में जूते दिखाना सिख सिद्धांतों का उल्लंघन। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब सरकार द्वारा श्री आनंदपुर साहिब में स्थापित की गई भाई जैता जी की यादगार में लगाई गई एक तस्वीर को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है।

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    उन्होंने कहा कि उस तस्वीर में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को भाई जैता जी को अमृत छकाते हुए पैरों में जूते (जोड़ा) पहने दिखाया गया है, जो सिख सिद्धांतों, मर्यादा और सिख भावनाओं का खुला उल्लंघन है।

    एडवोकेट धामी ने कहा कि यह यादगार, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया है संगत को प्रेरणा देने के बजाय उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगी। सिख मर्यादा के अनुसार अमृत संस्कार एक अत्यंत पवित्र और मर्यादित विधि है, जिसमें पूर्ण श्रद्धा और आदर का होना आवश्यक है, लेकिन सरकार ने इस पवित्र प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते हुए सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन किया है।

    शिरोमणि कमेटी प्रमुख ने सरकार की धार्मिक मामलों में लगातार दखलअंदाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले भी श्रीनगर में आयोजित धार्मिक समागम के दौरान मर्यादा का उल्लंघन किया गया था और अब भाई जैता जी की यादगार में यह सिद्धांत-विरोधी तस्वीर लगाकर वही गलती दोहराई गई है।

    उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि सरकार धार्मिक और ऐतिहासिक विषयों की समझ न रखने वाले अधिकारियों से ऐसे काम करवा रही है, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर सिद्धांतिक त्रुटिया सामने आ रही हैं।

    धामी ने कहा कि सिख धर्म मर्यादित जीवन शैली और मौलिक मूल्यों पर आधारित है, और इसकी विशिष्टता इसी मर्यादा में निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि शिरोमणि कमेटी लगातार सरकार से अपील कर रही है कि वह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत शताब्दी से संबंधित विकास कार्यों पर ध्यान दे और शिरोमणि कमेटी द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग करे, परंतु सरकार का ध्यान केवल राजनीति पर केंद्रित दिखाई देता है।

    सरकार तत्काल इस आपत्तिजनक तस्वीर को यादगार से हटाए और सिख समुदाय से माफी मांगे। यदि सरकार ने इस गंभीर मामले को हल्के में लिया, तो शिरोमणि कमेटी अपने स्तर पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।