मजीठिया को जमानत मिलने पर एसजीपीसी प्रधान धामी ने किया फैसले का स्वागत; न्यायपालिका पर भरोसा जताया
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत का स्वागत किया है। उन्होंने ...और पढ़ें

अकाली दल नेता बिक्रम मजीठिया और एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी।
HighLights
एसजीपीसी प्रधान धामी ने मजीठिया की जमानत का स्वागत किया।
उन्होंने न्यायपालिका के निष्पक्ष फैसले की सराहना की।
मजीठिया की जमानत से पंजाब की राजनीति में हलचल।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को माननीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमानत दिए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को मजबूत करने वाला निर्णय बताया।
एडवोकेट धामी ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका पर समाज का हमेशा से भरोसा रहा है और हर व्यक्ति को अदालतों से न्याय की उम्मीद होती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मजीठिया को जमानत दिए जाने का फैसला यह साबित करता है कि देश की न्याय प्रणाली निष्पक्ष और संतुलित ढंग से कार्य कर रही है। ऐसे फैसलों से आम जनता का भरोसा और मजबूत होता है।
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एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून और न्याय की भूमिका सबसे अहम होती है। जब अदालतें तथ्यों, कानून और परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती हैं, तो इससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होती हैं। उन्होंने कहा कि मजीठिया से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उसी न्यायिक संतुलन का उदाहरण है।
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पंजाब की राजनीति में हलचल तेज
एडवोकेट धामी ने आगे कहा कि अकाली दल और सिख समाज हमेशा संविधान, कानून और न्यायपालिका का सम्मान करता रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी अदालतें निष्पक्ष रूप से मामलों की सुनवाई कर न्याय प्रदान करती रहेंगी। उल्लेखनीय है कि सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया को जमानत मिलने के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।
इस फैसले को अकाली दल के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। वहीं, विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस निर्णय को न्याय की जीत बताया जा रहा है। एसजीपीसी प्रधान के इस बयान के बाद यह साफ है कि धार्मिक संस्था भी न्यायपालिका के फैसलों को लोकतंत्र की मजबूती से जोड़कर देख रही है।
