SGPC प्रधान ने पंजाबी यूनिवर्सिटी द्वारा महान कोष की बेअदबी करने की निंदा की, माफी मांगने की बात कही
एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला द्वारा महान कोष को जमीन में दबाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे सिख परंपराओं के विरुद्ध बताया और कहा कि गुरबाणी व सिख साहित्य का सम्मान करना हर संस्था का कर्तव्य है। धामी ने यूनिवर्सिटी से माफी मांगने और अखंड पाठ साहिब करवाने की मांग की क्योंकि यह सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटना है।

संवाद सहयोगी, अमृतसर। एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला की ओर से महान कोष को जमीन के नीचे दबा कर की बेअदअी की हरकत को दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय व सिख परंपराओं के विरुद्ध करार दिया है।
उन्होंने कहा कि पावन गुरबाणी व सिख साहित्य के प्रति आदर सम्मान रखना हर संस्था की जिम्मेदारी है। महान कोष कोई सिर्फ किताब नहीं है बल्कि यह सिख कौम की विरासत है जिनका सही मर्यादा से संस्कार किया जाना चाहिए। क्योंकि इसमें गुरबाणी की पावन पंक्तियां व सिख इतिहास व सिद्धांतों के बारे जानकारी दर्ज है। इसलिए सिख भावनाओं का ख्याल रखा जाना चाहिए।
उन्हाेंने कहा कि यदि यूनिवर्सिटी को गलतियों वाले महान कोष के कुछ अंक खत्म करने की जरूरत थी तो इसलिए एसजीपीसी से संपर्क किया जाना चाहिए था। एसजीपीसी की ओर से श्री गोइंदवाल साहिब में पिछले लंबे समय से पावन गुरबाणी, पुराने सिख धार्मिक ग्रंथों व साहित्य का गुरमति के अनुसार संस्कार किया जा रहा है। इसलिए किसी भी संस्था को चाहिए कि वह अपने मनमर्जी के फैसले करने की बजाय धार्मिक मर्यादा के अनुसार कदम उठाएं।
एडवोकेट धामी ने जोर देकर कहा कि यूनिवर्सिटी की ओर से की गई यह कार्रवाई धार्मिक सिद्धांतों व सिख परंपरा की अनदेखी है। जिससे सिख कौम की भावनाओं काे गहरा झटका लगा है। पंजाबी यूनिवर्सिटी के प्रबंधकों को इसकी तुरंत सिख कौम से माफी मांगनी चाहिए। पछतावे के लिए श्री अखंड पाठ साहिब करवा कर अरदास करनी चाहिए।
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