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    सरकार के निशाने पर जीएनडीयू के वीसी जसपाल संधू

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 23 Aug 2022 11:31 AM (IST)

    पंजाब फेडरेशन आफ यूनिवर्सिटी एंड कालेज टीचर्स आर्गेनाइजेशन की शिकायत का पंजाब सरकार ने संज्ञान ले लिया है।

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    सरकार के निशाने पर जीएनडीयू के वीसी जसपाल संधू

    जासं, अमृतसर: पंजाब फेडरेशन आफ यूनिवर्सिटी एंड कालेज टीचर्स आर्गेनाइजेशन की ओर से गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) के वीसी डा. जसपाल सिंह संधू के खिलाफ भेजी गई शिकायत के बाद वह पंजाब सरकार के निशाने पर आ गए हैं। सरकार ने विजिलेंस को शिकायतों की पड़ताल करके रिपोर्ट देने को कहा है। विजिलेंस ब्यूरो के आइजी मनमोहन सिंह को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। संभावना है कि एक-दो दिन में चंडीगढ़ से विजिलेंस ब्यूरो की टीम यूनिवर्सिटी में आकर शिकायत करने वालों के बयान कलमबद्ध करे।

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    आर्गेनाइजेशन की ओर से लगातार आरोप लगाए जा रहे थे कि वीसी जसपाल संधू अपनी मनमर्जी के साथ यूनिवर्सिटी के सिडीकेट सदस्यों का चयन करते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्रार, डीन की भर्ती भी नियमों को ताक पर रखकर की गई है, क्योंकि जिन लोगों को उच्च पदों पर बैठाया गया है, वे यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक योग्य नहीं हैं। यूनिवर्सिटी में अन्य वरिष्ठ अध्यापकों को नजरअंदाज किया गया है।

    आर्गेनाइजेशन के प्रधान प्रोफेसर लखविदर सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी में सिडीकेट सदस्य का चयन एक साल के लिए होता है, लेकिन वीसी जसपाल संधू की ओर से लगातार पांच साल तक कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री को इस पद पर नियुक्त रखा गया। इसके अलावा यूजीसी के पूर्व चेयरमैन जो वीसी संधू के चहेते हैं, उनको भी लगातार सिडीकेट का सदस्य बनाया जा रहा है। रजिस्ट्रार प्रोफेसर केएस काहलों को नियुक्त किया गया है, जबकि उनकी पीएचडी ही पूरी नहीं है। यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक इन पदों के लिए पीएचडी होना जरूरी है। इसके अलावा ऑर्गेनाइजेशन ने खुद वीसी की एलिजिबिलिटी पर भी सवाल उठाए है। कैप्टन सरकार ने लगाया था वीसी संधू को, तीन साल बढ़ाया था कार्यकाल

    कांग्रेस की पूर्व कैप्टन सरकार की ओर से वीसी डा. जसपाल सिंह संधू को 2017 में नियुक्त किया गया था। 2020 में उनका कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद तीन साल के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था। ऐसे में पहले दिन से ही वीसी को विरोध झेलना पड़ रहा है। वहीं प्रोफेसर लखविदर सिंह ने कहा कि हाल ही में सिडीकेट और सीनेट में नए सदस्यों को जोड़ा गया है। उन सबके बारे में भी जांच की जाए, क्योंकि लगातार केवल चहेतों को पद देने के लिए यहां पर काम चल रहा है। वीसी बोले, जो लोग मुद्दा उठा रहे, वो 2020 में ही खत्म हो चुका

    दूसरी तरफ वीसी डा. जसपाल सिंह संधू ने कहा कि जो लोग उनके खिलाफ मुद्दा उठा रहे हैं, वो साल-2020 में ही खत्म हो चुका है। पीएचडी के विषय में उठाए मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने एमबीबीएस को डाक्टर की डिग्री की मान्यता दे रखी है। इसके तहत वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जीएनडीयू में हर पद पर वरिष्ठता के हिसाब से ही पदों को भरा जाता है। वीसी ने आगे कहा कि गुरु नानक टीचर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जीएनडीयूटीए) के एक वाइस प्रधान प्रोफेसर बनना चाहते हैं, जिनके पास तीन ही पेपर हैं, जो शर्त पूरी नहीं करते हैं। इस एसोसिएशन के प्रधान भी रजिस्ट्रार लगना चाहते हैं, जो अपनी कई सिफारिशें करवा चुके हैं। सचिव की पंजाब सरकार ने जांच शुरू की है, जिसमें वह जांच को बंद करवाना चाहते हैं। जीएनडीयूटीए के चौथे व्यक्ति हैं, जोकि सिडीकेट के फैसले को छोड़कर अपने पद का गलत लाभ लेना चाहते हैं। शिकायतों की वेरिफिकेशन की जा रही: चीफ विजिलेंस

    चीफ विजिलेंस डायरेक्टर वरिदर कुमार ने पुष्टि करते हुए कहा कि अमृतसर में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के खिलाफ शिकायत आई है। इसकी विजिलेंस वेरिफिकेशन कर रही है।