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    Punjab Flood: सुबह सोकर उठे तो पानी से घिरे... 84 घंटों से छतों पर गुजर रही जिंदगी, 37 साल में नहीं दिखा ऐसा मंजर

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 02:01 AM (IST)

    अजनाला के 45 गांवों में बाढ़ से तबाही मची है जहाँ सात फीट तक पानी भर गया है। रावी दरिया का जलस्तर बढ़ने से 24 किलोमीटर तक पानी घुस गया है जिससे 60-70 हजार लोग प्रभावित हैं। लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं पीने के पानी और भोजन की कमी है।

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    84 घंटों से छतों पर गुजर रही जिंदगी (जागरण फोटो)

    विपिन कुमार राणा, अजनाला। कुदरत का कहर बाढ़ के पानी के रूप में ऐसा आया कि सबकुछ तबाह हो गया। विधानसभा हलका अजनाला के रमदास सेक्टर के 45 गांवों में रात को सोये लोग सुबह पानी से घिरे पाए गए। वर्षों की मेहनत से बने घर पानी में डूब गए हैं।

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    सामान के साथ पाले पशु भी बह गए। गांवों में सात-सात फीट तक पानी भरा है। पिछले 84 घंटे से लोग छतों पर जीवन बसर कर रहे हैं। पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। बाढ़ से पहले घरों की टंकियों में भरे पानी से प्यास बुझाई जा रही है। जीवन अभी तक बचे हुए राशन से चल रहा है।

    रावी दरिया का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। रावी दरिया पर बने तटबंधों के टूटने से रमदास सेक्टर के बार्डर से 24 किलोमीटर तक पानी अंदर तक घुस आया है। 45 गांव पानी-पानी हो गए हैं। 37 साल बाद ऐसा तबाही का मंजर देखने को मिला है।

    25 अगस्त से पानी ऊपर आना शुरू हुआ

    इससे पहले 1988 में ऐसे हालात बने थे। यही वजह है कि लोग इसके लिए तैयार नहीं थे। 25 अगस्त को पानी चढ़ना शुरू हुआ तो प्रशासनिक सिस्टम अलर्ट हो गया, लेकिन इससे पहले कुछ कर पाते, पानी का बहाव इतना तेज हुआ कि गांवों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।

    जिन 14 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया था, रात होते-होते उनमें पानी घुस आया और पांच से सात फीट तक पानी भर गया। ऐसे में ग्रामीणों के लिए पलायन करना भी मुश्किल हो गया।

    राहत पहुंचाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन बार्डर पर कई गांव ऐसे हैं, जहां राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है। सामान व पशु बह गए, राशन में भी नाममात्र का बचा अजनाला हलके में बाढ़ के पानी की वजह से हालात गंभीर हैं।

    70 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया

    इन 45 गांवों में फंसे 60 से 70 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। लोग छतों पर तिरपाल के सहारे जीवन बसर कर रहे हैं। जिनके पास तिरपाल नहीं है, वे खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। रात भर मच्छर काटते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

    गांव नंगल सोहली के सुखविंदर, साहिब जीत और जसपाल सिंह ने बताया कि गांव में छह से सात फुट तक पानी भरा हुआ है। ऊंचे घरों में लोग टेंट या तिरपाल लगाकर रह रहे हैं। सामान और पशु बह गए हैं, और राशन में भी नाममात्र का बचा है।

    वीरवार को पानी गग्गो माहल में दाखिल हो गया और शुक्रवार को पानी उससे आगे बढ़ गया। अजनाला सिटी के लोगों में भय है कि अगर बहाव कम न हुआ तो प्रापर अजनाला भी पानी की चपेट में आ जाएगा। फिलहाल पानी अभी सात से आठ किलोमीटर दूरी पर है।