जासं, अमृतसर: मोहल्ला क्लीनिक खोलकर मरीजों के जख्म पर संवेदना का मरहम लगाने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने न तो जिला अस्पतालों की सुध ली है और न ही प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की। ढाब खटिकां स्थित द प्रिंसेज आफ वेल्स लेडीज अस्पताल में एकमात्र गायनी डाक्टर अवकाश पर चली गई।

आकस्मिक अवकाश लेना डाक्टर का अधिकार है, पर उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था तो होनी ही चाहिए। डाक्टर के अवकाश पर जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनके स्थान पर किसी की तैनाती नहीं की। इसका दुष्प्रभाव यह है कि जनाना अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, जनाना अस्पताल में एकमात्र गायनी डाक्टर अनुपमा की ओपीडी में प्रतिदिन 20 से 25 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं। प्रतिदिन औसतन दो से तीन महिलाओं की डिलीवरी भी इसी डाक्टर के जिम्मे है। डा. अनुपमा पिछले चार दिन से पंद्रह दिन के अवकाश पर हैं। इनके अवकाश पर जाने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को है, पर गर्भवती महिलाओं को नहीं। पिछले चार दिन से करीब 55 गर्भवतियों को सिविल अस्पताल में रेफर किया गया है। वीरवार को सुबह यहां दस गर्भवती महिलाएं जांच के लिए पहुंचीं, पर डाक्टर नहीं थीं। एक मेडिकल आफिसर तो ओपीडी में बैठी थी, पर गर्भवती महिलाएं डा. अनुपमा से अपनी जांच करवाती रही हैं, इसलिए उनसे ही जांच करवाना चाहती हैं।

मेडिकल आफिसर ने कहा, सिविल अस्पताल चले जाओ

रजनी नमक मंडी निवासी रजनी ने बताया कि पिछले सात माह से डा. अनुपमा से जांच करवा रही हूं, अब उनके अवकाश पर जाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वीरवार को मेडिकल आफिसर ने कहा कि सिविल अस्पताल में चले जाओ। वहां गायनी डाक्टर को दिखाओ। ऐसी असंख्य महिलाएं हैं जिन्हें अब सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है।

सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच का बढ़ा बोझ

सिविल अस्पताल में पहले से ही गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। यहां प्रतिदिन 400 से अधिक महिलाओं की ओपीडी की जाती है, वहीं 15 से 20। डिलीवरी हो रही हैं। ऐसे हालात में ढाब खटिकां से आई महिलाओं की जांच नहीं हो पा रही। जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत निश्शुल्क एवं सुरक्षित प्रसव का दावा करने वाली सरकार इस कुव्यवस्था को दूर करने में असमर्थ साबित हुई है।

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