अमृतसर, [पंकज शर्मा]। Kisan Andolan: पंजाब में किसान ह‍रियाणा-दिल्‍ली बार्डर पर चल रहे आंदोलन के लिए गर्मियों के लिहाज से खास तैयारियां कर रहे हैं। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन लंबा चलने की संभावना है। गर्मियों के लिए वे अपनी ट्रैक्‍टर ट्रालियों को खास तरीके से तैयार कर रहे हैं और इन्‍हें घर के तरह का रूप दे रहे हैं। इन ट्रैक्‍टर ट्रालियों को गर्मियों के लिहाज से सभी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। गद्दे और बेड लगाने के साथ इनमें बिजली कनेक्‍शन व पंखे के भी इंतजाम किए गए हैं। मच्‍छरों से बचाव के पूरे ट्रैक्‍टर ट्राली में जाल लगाए गए हैं।

दिल्‍ली के सिंघु बार्डर और टिकरी बार्डर पर किसान पहले ठिठुरती सर्दी का मुकाबला करते हुए आंदोलन में जमे रहे। अब गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है। ऐसे में मौसम की चुनौतियों का मुकाबला करते हुए आंदोलन जारी रखने के लिए किसानों ने आवश्यक प्रबंध शुरू कर दिए है। सर्दी के मौसम में यहां सर्दी से बचाव के लिए सभी प्रबंध किसानों ने किए थे तो अब गर्मी का मुकाबला करने के लिए ट्रालियों को सुविधाओं से लैस करने की जगाड़ू व्यवस्था करनी शुरू कर दी गई है।

ट्रैक्‍टर में लगाए गए गद्दे। (जागरण)

गर्मी व मच्छरों से बचाव होगा इन जगाडू ढंग से तैयार की ट्रालियां

जिले के गांव कत्थनंगल के गुरलाल सिंह ने गर्मी के मौसम में मच्छरों व मक्खियों आदि से बचाव के उपाय करने के साथ ही अपनी ट्राली को आधुनिक सुविधाओं से युक्‍त किया है। वह जो किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सक्रिय सदस्य हैं। गुरलाल ने बताया कि वह पहले भी तीन बार जत्थों के साथ अपनी ट्राली लेकर दिल्ली जा चुके हैं। वह पहली बार 18 दिन धरने में रहे और दूसरी बार 25 दिन धरना स्‍थल पर रहे हैं।

ट्राली में सिलिंग फैन, एक्‍सजास्‍ट फैन व फर्राटा पंखे की भी व्‍यवस्‍था

गुरलाल ने बताया कि आंदोलन स्‍थल पर रात्रि के समय जो मुश्किलें आती है उसको ध्‍यान में रख उन्‍होंने अपनी 17 फीट वाली ट्रैक्‍टर ट्राली को माडीफाई किया है। ट्राली की छत को बडियां टीनों वाली बनाया गया है। ट्राली के चारों को मच्छर व मक्खियों आदि को रोकने के लिए बारीक जाली लगाई गई है। ट्राली को एक बढिया कमरे के रूप में तैयार किया गया है। इस में एक छत वाले पंखे, एक एक्सजास्ट फैन, एक फर्राटा पंखे आदि की व्यवस्था की गई थी।

ट्रैक्‍टर ट्राली में लगाई गई जाली और बिजली कनेक्‍शन की व्‍यवस्‍था। (जागरण)

बिजली कनेक्‍शन के विशेष प्रबंध किए गए

उन्‍होंने कहा कि वहीं इस ट्राली में बिजली कनेक्‍शन के लिए सात प्लग की व्यवस्था भी की गई है। अंदर और बाहर चारों और एईडी बल्ब लगाने के आठ प्वाइंट की भी व्यवस्था की गई है। अंदर एलसीडी टीवी लगाने की भी व्यवस्था है। रात्रि को ट्राली रूपी आधुनिक कमरे में 15 के करीब व्यक्ति आराम से बिना किसी मुश्किल सो सकते है। अन्य लोगों के लिए फोल्डिंग बैड, मच्छर दानियों आदि की भी व्यवस्था की गई है। ट्राली रूपी कमरे के अंदर मासक्यूट रैपलेंट लगाने के लिए भी अलग से प्लग प्वाइंट की व्यवस्था की गई है।

कमरे के रूप में तैयार की गई ट्रैक्‍टर ट्राली। (जागरण)

कमरे का रूप दिया गया, दरवाजे और सीढियों की भी व्‍यवस्‍था

गुरलाल ने बताया कि ट्राली एक रूम की तरह बंद है। हवा आने के लिए उसमें जालियां और खिडकी आदि की व्यवस्था की गई है। ट्राली का बैक डाला बंद कर दिया गया है। बैक में ट्राली के अंदर व बाहर जाने के लिए एक दरवाजे की और उतरे व चढऩे के लिए सीढियों की व्यवस्था भी की गई है। ट्राली के अंदर सोने की बढियां व्यवस्था की गई है। बढियां क्वालिटी के मैप आदि भी अंदर लगाए गए है।

ट्रैक्‍टर ट्राली में लगाया गया पंखा। (जागरण)

गुरलाल ने कहा, हमने ट्राली को एक रूम का रूप देकर एक माडल आंदोलन में हिस्सा लेने वाले अन्य किसानों को दिया है ताकि वे भी मौसम के बदलाव को मुख्य रख अपनी अपनी ट्रालियों में इस तरह की आधुनिक सुविधाओं का प्रबंध कर सकें। इससे आंदोलनकारी किसानों को काफी सहुलियत मिलेगी। जिले में अन्‍य जगहों पर भी किसान इसी तरह से ट्रैक्‍टर ट्रालियों को तैयार कर रहे हैं।

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