अमृतसर कचहरी में फिर शुरू हुआ फर्जी जमानत का खेल, दो गिरफ्तार; हत्या से लेकर नशा तस्करी तक के तय थे रेट
अमृतसर कचहरी में फर्जी जमानत भरने वाला गिरोह फिर सक्रिय हो गया है, जिसमें दो सदस्यों सुखचैन सिंह और हीरा ...और पढ़ें

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HighLights
अमृतसर कचहरी में फर्जी जमानत गिरोह फिर सक्रिय।
गिरोह के दो सदस्य सुखचैन सिंह, हीरा सिंह गिरफ्तार।
अपराध के अनुसार जमानत की दरें तय होती थीं।
नवीन राजपूत, अमृतसर। अमृतसर की कचहरी में आपराधिक मामलों में जमानत भरने वाले गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो चुके हैं। चार गिरोह के डेढ़ दर्जन से ज्यादा सदस्यों कचहरी और उसके आसपास अपने ठिकाने बना लिए हैं। चुपचाप कानून की नाक तले उनका धंधा चल रहा है। इसी जगह पर सेशन जज से लेकर डीसी, पुलिस कमिश्नर, एसएसपी और एससपी (विजिलेंस) अफसर भी बैठते हैं।
शनिवार को फर्जी जमानत भरने वाले गिरोह के सुखचैन सिंह और हीरा सिंह की धरपकड़ की गई तो उन्होंने कई राज खोले है। पुलिस को आशंका है कि आरोपितों ने दो दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामलों में जमानत के लिए दस्तावेज तैयार करवाए और फर्जी लोग दिखाकर उन्हें तस्दीक भी कराया।
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जिन्हें जानते भी नहीं उनकी करवाते हैं जमानत
गिरोह के सदस्य जिन्हें जानते भी नहीं हैं उनकी जमानत करवा देते हैं। जमानत पर जेल से छूटने के बाद आरोपित फरार हो जाते हैं और इस तरह के मुकदमें बाद में पुलिस और कोर्ट के लिए सिरदर्द बनते है। छोटे से छोटे और बड़े से बड़े आपराधिक मामलों में उनका रेट तय है। डील करवाने वाले कचहरी परिसर में काम करने वाले कुछ क्लर्क और मुंशी हैं।
यह गिरोह पहले कचहरी में खुलेआम घूमते थे, लेकिन कोर्ट की सख्ती के कारण इन्हें यहां से भगा दिया गया। अब कुछ दिनों से यह गिरोह कचहरी और इसके आसपास दोबारा से एक्टिव होने लगे हैं। हालांकि कानून के कसे गए शिकंजे के कारण उन्होंने काम छिपकर करना आरंभ किया था।
चार आरोपित का आज तक नहीं मिला पता ठिकाना
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों पर जमानत करवाकर भागे एक केस में अभी तक जांच जारी है। चेक बाउंस, गबन और धोखाधड़ी के एक मामले में जमानत करवा कर भागे दिल्ली मुखर्जी नगर के बलजिंदर सिंह, लुधियाना के हरबंस सिंह मदन लाल का आज तक पता नहीं लग सका है। उक्त आरोपितों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में केस दर्ज है।
चार साल बीते छह आरोपितों का पता नहीं
सिविल लाइन थाने की पुलिस ने साल 2022 में कोर्ट के आदेश पर एफआइआर नंबर 254 दर्ज कर छह आरोपितों को नामजद किया था। सभी ने फर्जी जमानत भरे थे। इससे पहले होशियारपुर पुलिस ने भी साल 2018 में इसी तरह का केस दर्ज कर अमृतसर और होशियारपुर के आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। आज तक इस केस में एक व्यक्ति को ही गिरफ्तार किया गया था।
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अपराधी का अपराध देख कर तय होता है रेट लिस्ट
- मामूली मारपीट के मामले में 15 से बीस हजार रुपये वसूले जाते है।
- हत्या प्रयास और हत्या जैसे अपराध में पचास हजार रुपये से एक लाख रुपये।
- अपहरण और पोस्को जैसे अपराध में पचास हजार से एक लाख रुपये।
- रंगदारी, अपहरण, दुष्कर्म और नशा तस्करी जैसे अपराध में मुंह मांगी रकम वसूल की जाती है।
इस तरह होती है डील
फर्जी जमानत कराने वाले गिरोह के सदस्य अब फिर कचहरी और उसके आसपास रहने लगे हैं। अपराध और एफआइआर के बारे में उन्हें कचहरी के क्लर्क या फिर मुंशी से जानकारी मिलती है। फिर डील कराने के लिए कचहरी के आसपास रेस्टोरेंट में मीटिंग कराई जाती है।
फिर मोबाइल नंबर एक्सचेंज होते हैं और रेट तय होने पर दस्तावेज तैयार करने का सिलसिला आरंभ होता है। इसमें पीड़ित ज्यादातर बाहरी राज्यों या फिर बाहरी जिलों के लोग होते है और दस्तावेज स्थानीय संपत्तियों के।
पहले भी किए गए थे पर्च दर्ज- डीसीपी
डीसीपी (ला एंड आर्डर) रविंदर पाल सिंह संधू ने कहा कि पहले भी इस तरह के केस दर्ज होते रहे हैं। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है। पुराने मामलों पर भी रिव्यू होने वाला है।
