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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चक्रव्यूह में फंसाकर निगलने वाली थी 'ब्लू व्हेल', आखिरी टास्क से पहले बची बच्चे की जान

By Ankit KumarEdited By:
Published: Tue, 12 Sep 2017 11:01 AM (IST)

बच्चा परिजनों से छिपकर गेम खेल रहा था। उसने कलाई पर कई कट भी लगाए थे। बच्चे के हाव-भाव व ...और पढ़ें

चक्रव्यूह में फंसाकर निगलने वाली थी 'ब्लू व्हेल', आखिरी टास्क से पहले बची बच्चे की जान
चक्रव्यूह में फंसाकर निगलने वाली थी 'ब्लू व्हेल', आखिरी टास्क से पहले बची बच्चे की जान

अमृतसर, नितिन धीमान। खतरनाक ब्लू व्हेल गेम एक पंद्रह वर्षीय बच्चे को निगल जाती, अगर उसके परिजनों को समय रहते जानकारी न मिलती। यह बच्चा मौत के इस जानलेवा खेल के तिलिस्मी जाल में बुरी तरह उलझ चुका था। वह डेढ़ माह से लगातार गेम का हर टास्क पूरा कर रहा था। न तो परिजनों से बात करता था और न ही पढ़ाई में मन लगाता था। परिजनों को जब मालूम हुआ तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। फिलहाल बच्चे को मनोरोग विशेषज्ञ की निगरानी में रखा गया है।

मौत का यह खेल खेलने वाला बच्चा अमृतसर के एक प्रतिष्ठित परिवार से संबंधित है। परिवार का इकलौता बेटा कंप्यूटर पर ब्लू व्हेल गेम में मशगूल रहता था। गेम के टास्क में दिए गए निर्देश के अनुसार बच्चे ने अपनी कलाई पर कट भी लगा लिए थे। इसका खुलासा तब हुआ, जब बच्चे को स्कूल भेजते समय मां की नजर उसकी कलाई पर पड़ी। उस पर बड़े-बड़े कट लगे थे। मां घबरा गई। उससे पूछा, पर वह बोला नहीं।

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चूंकि, ब्लू व्हेल गेम से देशभर में बच्चों व किशोरों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं, इसलिए मां को संदेह हुआ कि कहीं उनका बच्चा भी इस खतरनाक गेम की ओर तो नहीं बढ़ रहा। इसकी पुष्टि के लिए परिवार के सदस्यों ने दिन-रात उस पर नजर रखनी शुरू कर दी। बच्चे के हाव-भाव व हरकतें देखकर परिवार दहल गया। यह बच्चा रात ढाई बजे उठकर छत पर टहलने लगता। खुद से ही बातें करने लगता। हर वक्त गुमसुम रहने वाला यह बच्चा इंटरनेट से लगातार जुड़ा था।

नुकीली वस्तुएं छुपाईं तो क्लास में शॉर्पनर के ब्लेड चुराए

वास्तविकता जानने के बाद परिजन कांप उठे थे। बच्चे को मोबाइल व कंप्यूटर से दूर कर दिया गया। घर की सभी नुकीली वस्तुएं मसलन चाकू, ब्लेड इत्यादि को छुपाकर रख दिया गया। यह सब करके परिजन बच्चे पर पूरी नजर रख रहे थे, पर ब्लू व्हेल का खूनी खेल इस बच्चे का पीछा नहीं छोड़ रहा था। घर में नुकीली वस्तु न मिलने पर बच्चे ने पेचकस उठाया और बैग में डालकर स्कूल ले गया।

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क्लास में अपने सहपाठियों के ज्योमेट्री बॉक्स से शॉर्पनर निकालकर पेचकस की मदद से ब्लेड निकाल लिए। ब्लेड की मदद से उसने एक बार फिर अपने हाथ पर कट लगाए। खुद को नुकसान पहुंचाने का हर हथकंडा यह बच्चा अपना रहा था। परिजन उसके बैग की तलाशी भी ले रहे थे। इस दौरान उसके बैग से शॉर्पनर के आठ ब्लेड बरामद हुए। आखिरकार बच्चे को मनोरोग विशेषज्ञ के पास लाया गया।

पढने में था तेज, गेम ने बनाया फिसड्डी

खतरनाक कामों के लिए उकसाने वाली ब्लू व्हेल गेम बच्चों को दुनिया से अलग-थलग कर देती है। वह इस गेम की तिलिस्मी दुनिया में खो जाते हैं। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. हरजोत मक्कड़ के अनुसार दसवीं कक्षा में पढऩे वाला यह बच्चा पढ़ाई में बहुत ही तेज था। ब्लू व्हेल के चक्रव्यूह में फंसने के बाद न केवल वह परिवार से दूर हुआ, अपितु पढ़ाई में भी जीरो हो गया। परिजनों के अनुसार स्कूल में लिए जाने वाले टेस्टों में बच्चे का प्रतिशत बहुत ही कम रहा है।

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गेम के मकडज़ाल से निकालने की कवायद शुरू

रंजीत एवेन्यू में डॉ. हरजोत ङ्क्षसह मक्कड़ के सेंटर में पहुंचा यह बच्चा कुछ भी बताने को तैयार नहीं था। लंबी काउंसलिंग के बाद बच्चे ने बताया कि वह गेम का आखिरी टास्क पूरा करने वाला था कि उसे इंटरनेट से दूर कर दिया गया है। वह पूरी गेम खेलना चाहता है। डॉ. मक्कड़ ने बताया कि बच्चा भारी तनाव में है। तनाव मुक्ति के लिए कुछ दवाएं दी गई हैं। गेम के मकडज़ाल से उसे बचाने के लिए निरंतर काउंसङ्क्षलग की जा रही है। फिलहाल, बच्चे की हालत में तेजी से सुधार आया है।

पूरी बाजू कट्स से भरी थी बच्चे की : डॉ. मक्कड़

डॉ. हरजोत सिंह मक्कड़ के अनुसार यह बच्चा फाइनल टास्क के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुका था। उसकी पूरी बाजू कट्स से भरी थी। वह लगातार खुद को नुकसान पहुंचा रहा था। इस गेम का अगला टास्क सुसाइड अटैंप्ट था। यह गनीमत थी कि परिजनों को इसकी जानकारी मिल गई और वे उसे उपचार के लिए ले आए।

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