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    Punjab Flood: अजनाला के 45 गांव डूबे, राहत के इंतजार में घरों की छत पर चढ़े लोग

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 11:04 AM (IST)

    अमृतसर में रावी नदी के बांध टूटने से अजनाला के 45 गांव जलमग्न हो गए हैं। रमदास से लेकर गग्गोमाहल तक पानी फैल गया है लोग छतों पर मदद का इंतजार कर रहे हैं। डीसी साक्षी साहनी राहत कार्यों में जुटी हैं पर नंगल सोहल के लोग 42 घंटे से छतों पर फंसे हैं और राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं।

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    अजनाला में बाढ़ के पानी में डूबे घर

    हरदीप रंधावा अमृतसर। रावी दरिया के टूटे बांधों से अजनाला हलके के 45 गांव पानी में डूब चुके हैं। बुधवार तक जहां रमदास गांव बाढ़ के पानी की चपेट में था, वहीं वीरवार को पानी रावी दरिया से आठ किलोमीटर दूर गग्गोमाहल गांव तक पहुंच गया। लोग घरों की छतों पर चढ़कर मदद का इंतजार करते दिखे।

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    उधर, वीरवार सुबह चार बजे ही बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचीं डीसी साक्षी साहनी अपनी टीम के साथ बाढ़ग्रस्त इलाकों में पहुंचीं और रहात कार्यों में तेजी लाते हुए लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने व खाद्य सामग्री वितरित करती रहीं।

    रमदास के गांव नंगल सोहल के लोगों ने बताया कि उन्हें 42 घंटे छतों पर बैठे हो गए हैं। अब तक उन्हें कोई राहत सामग्री भी नहीं मिली है। हालांकि आसपास इलाके में हेलीकाप्टर से लोगों को थोड़ी मदद मिली है।

    लोगों का कहना है कि रात में उन्हें घर की छतों पर रहने के लिए कोई तिरपाल या तंबू आदि नहीं मिले हैं। यदि रात में वर्षा हुई तो बचाव करना मुश्किल हो जाएगा। घर में खाने पीने का भी थोड़ा सा ही सामान बचा है, जो खत्म होने के बाद परेशान होना पड़ सकता है।

    उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत केंद्र बनाए गए हैं। वहीं, लोग इन केंद्रों में न जाकर रिश्तेदारों के पास जाना पसंद कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि 40-45 गांवों की 50-60 हजार की आबादी के लिए शासन व प्रशासन के पास प्रबंध नहीं हैं।

    गांव गग्गोमाहल में बाढ़ से प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें बचाने कोई नहीं आया है। देर शाम तक बढ़ते जलस्तर से लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाई है। कई लोग अब भी फंसे हुए हैं। खेतों के साथ-साथ लोगों के घरों में 10-10 फीट तक पानी भर चुका है।

    लोगों जान बचाने को घरों की छतों पर चढ़ने को मजबूर हैं। रतन सिंह ने कहा कि धुस्सी बांधों को पहले पक्का करना चाहिए था, मगर पहले कोई ध्यान नहीं दिया है। दलजीत सिंह ने कहा कि वे गुरु का बाग साहिब से आए हैं, ताकि वे लोगों की मदद कर सकें।

    गरजीत सिंह ने बताया कि वे हड्ड़ कलां से गग्गोमाहल में रिश्तेदार के घर जा रहे थे, मगर रास्ते में ही पानी देखकर लौट गया। दरिया के पानी में सांप भी निकल रहे हैं।