खून का रंग एक पर मोल अलग-अलग जीएनडीएच में 1450 रेट, सिविल में 300
सिविल अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. एसएस रियाड़ का कहना है कि हमें विभाग से गाइडलाइन है कि मरीज से 300 रुपये लिए जाएं। वहीं गुरुनानक देव अस्पताल की ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. नीरज शर्मा का कहना है कि रक्त के रूप में मिलने वाली राशि खजाने में जमा करवाई जाती है। हमें ऐसा कोई आदेश नहीं मिला कि मरीजों को 300 रुपये में रक्त दिया जाए।
नितिन धीमान, अमृतसर
रक्त एक ऐसा शारीरिक द्रव्य है जिसे किसी भी प्रयोगशाला में तैयार नहीं किया जा सकता। रक्त की जरूरत आन पड़े तो इंसान ही रक्तदान करके इंसान की जिदगी बचा सकता है। दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में एक ही रंग का खून अलग-अलग भाव में बिक रहा है। अमृतसर के सिविल अस्पताल व गुरु नानक देव अस्पताल स्थित ब्लड बैंकों में रक्त के लिए अलग-अलग रेट निर्धारित हैं। सिविल अस्पताल में जहां 300 रुपये प्रति यूनिट मिलता है, वहीं गुरु नानक देव अस्पताल में यह 1450 रुपये प्रति यूनिट है। इंसान का खून है, पर दोनों अस्पतालों में अलग-अलग दाम में बिकता है।
दरअसल, मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग द्वारा संचालित गुरु नानक देव अस्पताल में महंगा रक्त मिलना मरीजों के लिए परेशानी का पर्याय बना हुआ है। निजी अस्पतालों से इस ब्लड बैंक में रक्त लेने के लिए आने वाले लोगों को 1450 रुपये लेकर प्रति यूनिट रक्त दिया जा रहा है। दूसरी तरफ सिविल अस्पताल में यह 300 रुपये है। इस सारी कुव्यवस्था का नुकसान जहां मरीजों को उठाना पड़ रहा है, वहीं सिविल अस्पताल का ब्लड बैंक मरीजों से भरा रहता है, क्योंकि यहां रक्त का दाम कम है।
यहां है समस्या
इस समस्या की मूल जड़ सरकारी उपेक्षा ही है। असल में स्वास्थ्य विभाग ने रक्त के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसके अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में उपचाराधीन मरीज को सरकारी ब्लड बैंक से निशुल्क उपचार मिलेगा, जबकि निजी अस्पताल में उपचाराधीन मरीज को 300 रुपये प्रति यूनिट देने होंगे। इसके विपरीत मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग ने ऐसी कोई गाइडलान जारी नहीं की। इस विभाग के अंतर्गत चलने वाले सरकारी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की अपेक्षा बड़े हैं और इनमें मरीजों की संख्या भी अधिक है।
मरीज के परिजनों को सहनी पड़ी थी परेशानी
हाल ही में प्रीति नामक एक युवती का ऑपरेशन एक निजी अस्पताल में हुआ था। इस दौरान रक्त की जरूरत पड़ी तो परिजन सिविल अस्पताल पहुंचे। यहां उन्हें 300 रुपये के हिसाब से प्रति यूनिट रक्त मिल गया। प्रीति को रक्त चढ़ा दिया गया। अगले दिन पुन: रक्त की जरूरत पड़ी। परिवार फिर से सिविल अस्पताल पहुंचा, पर ब्लड बैंक में रक्त नहीं था। ऐसी स्थिति में परिजन गुरु नानक देव अस्पताल पहुंचे। यहां एक यूनिट रक्त लिया और 300 रुपये दिए, पर स्टाफ ने कहा कि यहां 300 नहीं 1450 रुपये लगेंगे। प्रीति के परिजनों ने कहा कि सिविल में तो 300 लिए जाते हैं, पर स्टाफ बोला आप वहीं से ले आओ। दोनों सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक में रक्त के रेट में भिन्नता सरकारी सिस्टम पर ही सवाल उठा रही है। ब्लड बैंकों में रक्त का अभाव
अफसोसनाक पहलू यह है कि इन दोनों सरकारी ब्लड बैंक में अक्सर रक्त का अभाव रहता है। इस ब्लड बैंक को शहर की कई ब्लड डोनेशन सोसाइटियां रक्त उपलब्ध करवाती हैं। यहां नेगेटिव ग्रुप का ब्लड मरीजों को अक्सर नहीं मिलता। कई बार तो पॉजिटिव ब्लड ग्रुप भी देने से स्टाफ इंकार कर देता है। इसी वर्ष जून माह में इस ब्लड बैंक में रक्त की भारी किल्लत आई थी। तब मरीजों को निजी ब्लड बैंकों की शरण में जाना पड़ा। गुरु नानक देव अस्पताल में भी रक्त की भारी कमी है।
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सिविल अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. एसएस रियाड़ का कहना है कि हमें विभाग से गाइडलाइन है कि मरीज से 300 रुपये लिए जाएं। वहीं गुरु नानक देव अस्पताल की ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. नीरज शर्मा का कहना है कि रक्त के रूप में मिलने वाली राशि खजाने में जमा करवाई जाती है। हमें ऐसा कोई आदेश नहीं मिला कि मरीजों को 300 रुपये में रक्त दिया जाए।
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