पिता नहीं दिला पाए साइकिल, नाराज होकर 13 वर्षीय किशोर राजस्थान से पहुंचा गोल्डन टेंपल
साइकिल नहीं मिलने से नाराज 13 वर्षीय किशोर घर से निकलकर बिना टिकट ट्रेन से अमृतसर पहुंच गया। श्री हरिमंदिर साहिब में मिला, समिति ने पिता से मिलवाया।

बाल कल्याण समिति के एमके शर्मा बच्चे व उसके पिता के साथ।
HighLights
13 वर्षीय किशोर साइकिल न मिलने पर घर से निकला।
हनुमानगढ़ से अमृतसर पहुंचा, श्री हरिमंदिर साहिब में मिला।
बाल कल्याण समिति ने पिता-पुत्र का भावुक मिलन कराया।
नितिन धीमान, अमृतसर। नई साइकिल की एक छोटी सी इच्छा... पिता से बार-बार की गई एक मासूम जिद... और जब आर्थिक मजबूरी के कारण पिता वह इच्छा पूरी नहीं कर पाए तो 13 साल का बेटा घर की दहलीज लांघकर सैकड़ों किलोमीटर दूर अमृतसर पहुंच गया। उसे शायद यह भी नहीं पता था कि घर से निकलने के बाद रास्ता उसे कहां ले जाएगा।
बस मन में यही टीस थी कि पिता ने साइकिल नहीं दिलाई। राजस्थान के हनुमानगढ़ से बिना टिकट ट्रेन में बैठा आठवीं कक्षा का छात्र मनोज कुमार जब श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचा तो वह अकेला था। घर पर उसके स्वजन उसकी तलाश में परेशान थे और यहां अनजान शहर में वह सहारे की तलाश में भटक रहा था।
श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में अकेले घूमते किशोर पर एसजीपीसी सेवादारों की नजर पड़ी। उसकी उम्र और चेहरे की मायूसी देखकर सेवादारों ने उसे प्यार से रोककर बातचीत की। पूछने पर उसने अपनी कहानी बताई। पता चला कि पिता से साइकिल दिलाने की जिद पूरी न होने से नाराज होकर वह घर से निकल आया है। सेवादारों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
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पुलिस ने बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किया
सूचना मिलने पर थाना ई-डिवीजन पुलिस मौके पर पहुंची और किशोर को अपने संरक्षण में लिया। पुलिस ने उससे विश्वास में लेकर बातचीत की। बाल कल्याण समिति के एडवोकेट एमके शर्मा से भी संपर्क किया गया। किशोर ने अपने पिता का नाम दिनेश कुमार और मोबाइल नंबर पुलिस और समिति को बताया। नंबर मिलते ही जब एमके शर्मा ने उसके पिता से बात की तो दूसरी तरफ पिता की आवाज में बेटे की चिंता साफ झलक रही थी।
आर्थिक स्थिति के चलते नहीं दिला पाया साइकिल
एमके शर्मा के अनुसार पिता ने बताया कि बेटा साइकिल की मांग कर रहा था, लेकिन आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह उसकी इच्छा पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि पैसे की कमी के कारण बेटे को साइकिल नहीं दिला पाए। शायद पिता ने यह सोचा भी नहीं होगा कि साइकिल की छोटी सी मांग पूरी न कर पाने का मलाल बेटे को इतना दूर ले जाएगा।
बेटे के अमृतसर में सुरक्षित होने की खबर मिलते ही पिता दिनेश कुमार तत्काल अमृतसर के लिए रवाना हो गए। बाल कल्याण समिति के कार्यालय में पिता और बेटे का सामना हुआ तो कुछ देर के लिए दोनों के बीच जैसे शब्द ही खत्म हो गए। जिस बेटे के घर से अचानक चले जाने के बाद पिता उसकी तलाश में परेशान थे, वही बेटा सामने सुरक्षित खड़ा था। बच्चे को देखते ही पिता भावुक हो गए।
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एक-दूसरे को देख रोने लगे
समिति ने पिता और बच्चे की काउंसलिंग की। पिता ने बच्चे की पहचान के लिए आधार कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद किशोर को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। बेटे को सुरक्षित अपने साथ लेकर पिता की आंखों में राहत के आंसू थे।
दिनेश कुमार में भरी आंखों से अपने पुत्र से कहा कि बेटा तुझे साइकिल मिल जाएगा मेरे साथ चल। पिता का यह सब सुनकर बेटा भी रोने लगा। बेटे की छोटी सी जिद से शुरू हुई यह कहानी आखिरकार पिता-पुत्र के भावुक मिलन के साथ सुखद अंत तक पहुंची।
