ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। चीन मसले पर शुक्रवार को हुई सर्वदलीय बैठक में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार का वक्तव्य राहुल गांधी के लिए एक सबक है। यह संदेश देता है कि देश के नेतृत्व की आकांक्षा पालने वाले नेताओं को इतिहास, भूगोल एवं उसके अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भी जानकारी रखनी चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पांच दिन से लगातार सवाल उठा रहे हैं कि सीमा पर भारतीय जवान निहत्थे क्यों गए? इसका जवाब उन्हें विदेश मंत्री द्वारा भी दिया जा चुका है। 

पवार ने कहा, दोनों देशों को समझौतों का सम्मान करते रहना चाहिए

सर्वदलीय बैठक में पवार ने भी स्पष्ट कहा कि सीमा पर सैनिक हथियार के साथ जाते हैं या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय संधि से तय होता है। सियासी दलों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। दरअसल शरद पवार कांग्रेस की ही सरकार में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के समय रक्षा मंत्री रह चुके हैं। वे 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच पहली बार शुरू हुए शांति प्रयासों के अगुआ भी रहे हैं। रक्षा मंत्री के रूप में 1993 में दोनों देशों के बीच पीस एंड ट्रंक्विलिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने चीन भी वही गए थे। इस बात का जिक्र भी उन्होंने शुक्रवार की सर्वदलीय बैठक में किया था। उन्होंने कहा कि 15 जून जैसे टकराव के बावजूद दोनों देशों को अपने बीच हुए समझौतों का सम्मान करते रहना चाहिए।

पवार ने माना, एलएसी पर चीन ने कर ली है मजबूत स्थिति 

सर्वदलीय बैठक में पवार ने यह भी माना कि पिछले तीन दशक में चीन ने भारत के साथ लगी 4,000 किमी की एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। खासतौर से पूर्वी लद्दाख में उसने अपनी स्थिति को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान दिया है। पवार के अनुसार, डुबरुक से दौलत बेग ओल्डी को जोड़नेवाली सड़क एलएसी पर पूरी तरह से भारतीय हिस्से में है। दौलत बेग ओल्डी न सिर्फ हमारी वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि हमें सियाचिन ग्लेशियर एवं काराकोरम दर्रे से जोड़ने वाला भी महत्वपूर्ण बिंदु है। चीनी सेना हमारे हिस्से वाली डुबरुक से दौलत बेग ओल्डी को जोड़नेवाली इस सड़क पर कब्जा करने के इरादे से ही गलवन घाटी में पांव जमाना चाहती है। इसका राजनीतिक हल तुरंत निकाला जाना चाहिए। 

पवार ने सर्वदलीय बैठक में दी चेतावनी  

पवार ने बैठक में यह चेतावनी भी दी कि चीनी सेना किसी भी समय इस रोड पर जबरन हमारा आवागमन रोक सकती है, जो हमारी सेना के लिए बहुत घातक सिद्ध हो सकता है। हालांकि, पवार की पार्टी इस समय महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना के साथ सत्ता में है। इससे पहले भी 1999 से 2014 तक लगातार राकांपा-कांग्रेस की साझा सरकार महाराष्ट्र में भी चलती रही और 2004 से 2014 तक केंद्र में भी। स्वयं पवार कांग्रेस की मनमोहन सरकार में लगातार 10 साल मंत्री भी रहे, लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पवार ने ही विदेशी मूल के मुद्दे पर सोनिया गांधी का विरोध करते हुए 1999 में कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन कर लिया था। 1999 में पवार द्वारा उठाया गया यह कदम याद दिलाता है कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर पवार आंख मूंदकर राहुल गांधी के अपरिपक्व बयानों का साथ देने वाले नहीं हैं।