जयपुर, नरेंद्र शर्मा। Rajasthan Deputy CM Sachin Pilot. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की आपसी लड़ाई कम करने को लेकर कांग्रेस आलाकमान के प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं। दोनों दिग्गजों की लड़ाई खत्म होने के स्थान पर बढ़ती ही जा रही है। मंगलवार को पायलट ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने मतदाताओं का दुख बांटे, उनकी पीड़ा सुने।

उन्होंने कहा कि एक तरफ तो हम गलत परंपराओं को खत्म करने की बात कर रहे हैं, जहां हम कहते हैं घूंघट से परहेज करना चाहिए। वहीं, दूसरी तरफ किसी नवजात की मौत पर हम उसके परिजनों से दुख बांटने नहीं जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में किसी नवजात की मौत पर तीये की बैठक और तेरहवीं की परंपरा नहीं हो तो भी उसके परिवार का दुख बांटने के लिए हमें जाना चाहिए। इस तरह की परंपरा हमें शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नवजात की मौत पर उसके परिजनों के आंसू पोंछने के लिए हमें परंपरा डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नवजात की मौत होती है तो उसके माता-पिता के आंसू पोंछने की जिम्मेदारी सरकार की है।

सीएम गहलोत ने कहा था, नवजात की मौत पर परिजनों से मिलने की परंपरा नहीं है

दरअसल, पिछले दिनों सीएम अशोक गहलोत ने कोटा के सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत पर खुद के नहीं जाने पर कहा था कि राजस्थान में नवजात की मौत पर उसके घर जाने की परंपरा नहीं है। उस समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया सहित अन्य नेताओं ने कोटा में बच्चों की मौत पर सीएम के वहां नहीं पहुंचने को दुखद बताया था। गहलोत ने पिछले दिनों जयपुर में एक सामाजिक संस्था के कार्यक्रम में महिलाओं के घूंघट हटाने की बात कही थी।

उन्होंने कहा था कि महिलाओं को घूंघट में देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता, आज दुनिया तरक्की कर रही है और हमारे प्रदेश की महिलाएं घूंघट में हैं। गहलोत के इन्ही दोनों बयानों पर कटाक्ष करते हुए मंगलवार को पायलट ने कहा कि जो हमें नई परंपरा डालनी चाहिए। एक तरफ तो हम घूंघट की पुरानी परंपरा को समाप्त करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नवजात की मौत पर उसके परिजनों के पास नहीं जाने की परंपरा की बात करते हैं। यह दोहरी बात नहीं होनी चाहिए।

पायलट ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा

पायलट ने मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर पंचायतों के चुनाव समय पर कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार निर्वाचन आयोग को चुनाव संपन्न कराने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। अब चुनाव कराने का पूरा दायित्व राज्य निर्वाचन आयोग का है। उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग ने संसाधनों की कमी के चलते चौथे चरण के चुनाव कराने में असमर्थता जताई है।

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