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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 18, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विधानसभा चुनाव से पहले बिखर रहा अजित पवार का कुनबा, शरद गुट में शामिल हुए NCP के दो दर्जन नेता; इस वजह से बदला पाला

By Agency Edited By: Piyush Kumar
Published: Thu, 18 Jul 2024 08:34 AM (IST)Updated: Thu, 18 Jul 2024 08:40 AM (IST)

अजित पवार गुट के दो दर्जन नेताओं ने शरद पवार गुट में दामन थाम लिया है। पुणे स्थित पिंपरी-चिंचवड़ के ...और पढ़ें

अजित गुट के दो दर्जन नेताओं ने बदल लिया पाला।(फोटो सोर्स: जागरण)
अजित गुट के दो दर्जन नेताओं ने बदल लिया पाला।(फोटो सोर्स: जागरण)

HighLights

  1. अजित गुट के 20 पूर्व नगर निगम पार्षद और अन्य इकाई प्रमुख नेताओं ने बदला पाला
  2. राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं
  3. टिकट न मिलने से नाराज हैं नेता

आइएएनएस, पुणे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार को बड़ा झटका लगा है। पुणे स्थित पिंपरी-चिंचवड़ के लगभग दो दर्जन पदाधिकारी बुधवार को शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा में शामिल हो गए। एक छोटे से समारोह में पार्टी के अन्य नेताओं की उपस्थिति में शरद पवार ने इन पदाधिकारियों का राकांपा (शरदचंद्र पवार) में स्वागत किया। इसमें कई महिलाओं सहित 20 पूर्व नगर पार्षद शामिल हैं।

इन नेताओं ने बदला पाला

शरद पवार ने अपने आवास पर उन्हें पार्टी का झंडा देकर अपना आशीर्वाद दिया। पाला बदलने वाले प्रमुख लोगों में राकांपा के पूर्व शहर अध्यक्ष अजितगव्हाणे, कार्यकारी अध्यक्ष राहुल भोसले, छात्र शाखा के प्रमुख यश साने, भोसारी विधानसभा सीट प्रमुख पंकज भालेकर सहित लगभग 20 पूर्व नगर निगम पार्षद और अन्य इकाई प्रमुख शामिल हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को सौंप दिया है।

यह चौंकाने वाला घटनाक्रम 20 जुलाई को पिंपरी-चिंचवड़ में होने वाली शरद पवार की रैली से पहले सामने आया है। पुणे जिले के अन्य हिस्सों से भी राकांपा नेताओं के शरद पवार के खेमे में आने की संभावना है। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं।

टिकट न मिलने से नाराज हैं नेता 

इसके चलते नेता अब धीरे-धीरे पाला बदलने लगे हैं। पुणे के एक नेता ने कहा कि गव्हाणे जैसे कुछ पदाधिकारी लोकसभा चुनाव में राकांपा का टिकट न मिलने से नाराज थे। वे आगामी विधानसभा चुनाव में भी टिकट मिलने की उम्मीद खो चुके थे। इसलिए, वे राकांपा (शरदचंद्र पवार) में चले गए।