संजय मिश्र, नई दिल्ली। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में दावेदारी को लेकर कांग्रेस में एक अनार सौ बीमार जैसी स्थिति है। महाराष्ट्र से मिलने वाली एक सीट के लिए कम से कम पार्टी के आठ गंभीर दावेदार हैं, जबकि तमिलनाडु में एक सीट के लिए होड़ में जुटे आधे दर्जन नेताओं की उम्मीद मंगलवार को द्रमुक की ओर से राज्य की दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा के साथ खत्म हो गई। कांग्रेस के असंतुष्ट खेमा जी-23 की अगुआई कर रहे वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद को तमिलनाडु से राज्यसभा में लाए जाने की संभावनाएं टटोल रहा था तो दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व डाटा एनालेटिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती की उम्मीदवारी पर विचार कर था।

तमिलनाडु में द्रमुक के दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के एलान से साफ हो गया है कि आजाद के लिए फिलहाल राज्यसभा में वापसी की गुंजाइश नहीं है। मालूम हो कि चार महीने पहले हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के समय द्रमुक ने कांग्रेस को 25 सीटें देकर चुनावी समझौता किया था और कम सीटें देने की एवज में उसे एक राज्यसभा सीट का वादा किया था।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने अपने अंदरूनी समीकरण साधने की रणनीति के साथ ही छह साल के पूरे कार्यकाल की राज्यसभा सीट के लिए इंतजार करना ज्यादा मुनासिब माना है। समझा जाता है कि अगले साल जून में तमिलनाडु की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में कांग्रेस वादे के अनुरूप अपनी एक सीट लेगी। इस लिहाज से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम के प्रमुख सदस्यों में गिने जाने वाले प्रवीण चक्रवर्ती को राज्यसभा में आने के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ेगा।

कांग्रेस के युवा चेहरों में शामिल रहे राजीव साटव के निधन से खाली हुई महाराष्ट्र की एक सीट पार्टी के खाते में आना तय है और इसलिए यहां उम्मीदवार बनने की मारामारी सबसे ज्यादा है। कांग्रेस, शिवसेना और राकांपा में बनी सहमति के अनुसार यह सीट कांग्रेस के खाते में ही रहेगी। साटव पार्टी नेतृत्व के काफी करीबी थे और इसी वजह से उनकी पत्नी को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावनाएं खारिज नहीं की जा रही हैं। हालांकि लंबे समय से नाखुश चल रहे युवा नेता मिलिंद देवड़ा भी इस होड़ में हैं। देवड़ा जिस तरह बीच-बीच में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर अपनी बेचैनी उजागर करते रहे हैं, वह पार्टी नेतृत्व के लिए भी चिंता का सबब रहा है।

जम्मू-कश्मीर की कांग्रेस प्रभारी रजनी पटेल भी इस दावेदारी में हैं तो मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम भी जोर लगाने में पीछे नहीं हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व से नाराज चल रहे निरूपम ने पिछले दिनों राहुल गांधी से मुलाकात भी की थी। पार्टी के वरिष्ठ महासचिव और जी-23 का हिस्सा रहे मुकुल वासनिक भी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। असंतुष्ट खेमा यहां भी आजाद के लिए गुंजाइश टटोलने का मौका नहीं छोड़ना चाहता। वहीं, हिमाचल प्रदेश के प्रभारी और बीसीसीआइ के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ल और वरिष्ठ नेता अविनाश पांडे भी अपने-अपने सियासी समीकरणों के सहारे इस सीट पर निगाह लगाए हुए हैं।