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    Waqf Bill 2025: 'वक्फ ने किया हसीन सितम, मुस्लिम लीग और... मिलकर हो गए हम', सुधांशु त्रिवेदी ने एक तीर से कितनों को लपेटा?

    Updated: Fri, 04 Apr 2025 10:36 AM (IST)

    Sudhanshu Trivedi on Waqf Bill In Rajya Sabha राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक गरीब मुस्लिमों के हित में लाया गया है। हमारी सरकार कथित उग्रवादी ठेकेदारों के बजाय गरीब मुसलमानों के साथ खड़ी है। विपक्ष तुष्टीकरण की राजनीति के जरिए मुसलमानों में गलतफहमी फैला रही है।

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    राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी (Photo - PTI)

    पीटीआई, नई दिल्ली। राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान गुरुवार को भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह विधेयक गरीब मुस्लिमों के हित में लाया गया है। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

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    उन्होंने कहा कि इस विधेयक को पूरी गंभीरता और विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया और पेश किया गया, लेकिन कुछ लोग इसके प्रावधानों को लेकर गलतफहमी फैलाने में जुटे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड अलग-अलग क्यों हैं? ताजमहल पर भी वक्फ बोर्ड ने दावा क्यों ठोक दिया?

    सुधांशु त्रिवेदी ने वक्फ संशोधन बिल का विरोध करने वाली पार्टियों पर भी तंज कसते हुए कहा, 'वक्फ ने किया क्या हसीन सितम, मुस्लिम लीग और शिवसेना हो गए हम।'

    त्रिवेदी ने कहा, 'यह लड़ाई शराफत अली और शरारत खान के बीच की है। हमारी सरकार शराफत अली के साथ खड़ी है और हम गरीब मुस्लिमों के साथ हैं।'

    कांग्रेस पर हमला

    त्रिवेदी ने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि वह हमेशा अपने वोट बैंक को देखकर अल्पसंख्यकों के समर्थन का फैसला करती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वक्फ बोर्ड की भूमि पर दावे पिछली सरकारों में कैसे वैध हो गए, जबकि ब्रिटिश शासनकाल में मुगलकालीन जमीनें पहले ही जब्त की जा चुकी थीं।

    उन्होंने सवाल किया कि हिंदुओं और सिखों की जमीनों की वसूली उसी तरह क्यों नहीं हुई, जैसी मुस्लिम वक्फ संपत्तियों की हुई?

    सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा

    त्रिवेदी ने मुस्लिम समाज की बदलती छवि पर चिंता जताते हुए कहा कि जब आजादी मिली तब मुस्लिम समाज की पहचान थी- बिस्मिल्लाह खान, उस्ताद जाकिर हुसैन, कैफी आजमी, साहिर लुधियानवी जैसे कलाकारों से..., लेकिन आज यह समाज किन नामों से जोड़ा जाता है- इशरत जहां, याकूब मेनन, अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम। उन्होंने इसे 1976 से शुरू हुई 'धर्मनिरपेक्ष राजनीति' का परिणाम बताया।

    विपक्ष की आपत्ति

    त्रिवेदी के बयान पर विपक्षी सांसदों- फौजिया खान (NCP-SP), जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) समेत कई नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज किया। उन्होंने कहा कि पूरे समुदाय को अपराधियों से जोड़ना निंदनीय है और इस पर आपत्ति दर्ज की जानी चाहिए।

    हालांकि, सभापति ने त्रिवेदी का बचाव करते हुए कहा कि उनके भाव को समझा जाना चाहिए। इस पर कांग्रेस के जयराम रमेश ने आपत्ति जताई।

    सरकार की रणनीति

    त्रिवेदी ने अपील की कि सभी दल एक साथ आकर इस 'प्रगतिशील विधेयक' को पारित करें। उन्होंने कहा कि हमने इस विधेयक का नाम रखा है 'उम्मीद', लेकिन कुछ लोग 'उम्माह' का सपना देख रहे थे। 'उम्माह' यानी एक इस्लामिक राष्ट्र। उम्मीद वालों को रोशनी दिख रही है, उम्माह वाले निराश हो रहे हैं।

    रामदास अठावले ने किया समर्थन

    केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि यह विधेयक परिवर्तनकारी है और इससे हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई समुदाय एक साथ आएंगे। कभी कांग्रेस को मुस्लिम वोट मिलते थे, अब हमको मिल रहे हैं। यह विधेयक पास होने के बाद सभी अल्पसंख्यक हमारे साथ आएंगे। अठावले ने यह भी दावा किया कि नरेंद्र मोदी चौथी बार भी प्रधानमंत्री बनेंगे।

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