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    150 करोड़ के जमीन घोटाले के मामले में घिरे सैम पित्रोदा, ईडी में दर्ज कराई गई शिकायत

    By Agency Edited By: Mahen Khanna
    Updated: Tue, 25 Feb 2025 06:21 AM (IST)

    Sam Pitroda land scam बेंगलुरु में कर्नाटक लोकायुक्त और ईडी में सैम पित्रोदा के खिलाफ 150 करोड़ रुपये के जमीन घोटाला मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। वरिष्ठ भाजपा नेता एनआर रमेश ने इससे संबंधित दस्तावेज सौंपे हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि कर्नाटक वन विभाग की भूमि से जुड़े 150 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले में कांग्रेस नेता सैम पित्रोदी संलिप्त हैं।

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    Sam Pitroda land scam सैम पित्रोदा की मुश्किलें बढ़ीं। (फाइल फोटो)

    आइएएनएस, बेंगलुरु। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के करीबी कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा के खिलाफ बेंगलुरु में कर्नाटक लोकायुक्त और ईडी में 150 करोड़ रुपये के जमीन घोटाला मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है।

    BJP ने दर्ज कराई शिकायत

    वरिष्ठ भाजपा नेता और कार्यकर्ता एनआर रमेश ने सोमवार को इससे संबंधित दस्तावेज सौंपे। रमेश ने आरोप लगाया कि कर्नाटक वन विभाग की भूमि से जुड़े 150 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले में कांग्रेस नेता सैम पित्रोदी संलिप्त हैं।

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    पर्यावरण विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव भी घिरे

    इस शिकायत में कर्नाटक के वन एवं पर्यावरण विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव और कर्नाटक विद्युत विनियामक आयोग के मौजूदा प्रमुख जावेद अख्तर के साथ ही वनों के प्रधान मुख्य संरक्षक आरके सिंह और संजय मोहन एवं बेंगलुरु शहरी क्षेत्र के उप वन संरक्षक एन रविंद्र कुमार व एसएस रविशंकर का भी नाम है।

    पित्रोदा को मिली थी पांच हेक्टेयर जमीन 

    इन सभी के खिलाफ फर्जीवाड़े, भ्रष्टाचार, सरकारी जमीन के अवैध अधिग्रहण और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप है। आरोप है कि 1996 में पित्रोदा द्वारा कर्नाटक वन विभाग से चिकित्सीय पौधों के संरक्षण और शोध के लिए आरक्षित वन भूमि को पट्टे पर देने के अनुरोध के बाद उन्हें येलहंका के पास पांच हेक्टेयर जमीन दे दी गई।

    इसे केंद्रीय वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री द्वारा भी स्वीकृति दी गई। 2001 में पांच वर्षों का पट्टा समाप्त होने के बाद इसे 2011 तक 10 साल के लिए बढ़ा दिया गया। रमेश ने आरोप लगाया कि तब से 14 वर्ष हो गए हैं और वन विभाग ने पट्टे का नवीनीकरण नहीं किया है।

    सरकारी जमीन पर चिकित्सीय पौधे उगाने का है मामला

    पित्रोदा की कथित रिश्वत के चलते ना तो कोई भी कार्रवाई की गई है और ना ही केंद्र सरकार को जानकारी दी गई है। पित्रोदा के संगठन ने बीते 29 वर्षों में इस सरकारी जमीन पर उगाए गए चिकित्सीय पौधे बेचकर कथितरूप से सालाना करोड़ों रुपये कमाए हैं।