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2019 चुनाव से पहले भाजपा विरोधी मुहिम में शामिल हुई सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले

कभी भाजपा और नरेंद्र मोदी का गुणगान करने में सक्रिय रही साध्वी सावित्री बाई फुले नीले बैनर तले भाजपा विरोधी मुहिम में शामिल हो गई हैं।

By Digpal SinghEdited By: Published: Mon, 02 Apr 2018 01:21 PM (IST)Updated: Mon, 02 Apr 2018 02:03 PM (IST)
2019 चुनाव से पहले भाजपा विरोधी मुहिम में शामिल हुई सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले

लखनऊ, [आनन्द राय]। कांशीराम स्मृति उपवन के मैदान में रविवार को आयी भीड़ की निगाहों में गेरुआ वस्त्र पहनीं भाजपा सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले थीं, लेकिन पूरा पंडाल नीले झंडे-बैनर और जय भीम के नारों से गूंज रहा था। आंबेडकर और कांशीराम के कटआउट भी जगह-जगह लगे थे।

साध्वी यह बताने से नहीं चूकीं कि उनके तन पर जो कपड़ा है, वह गौतम बुद्ध का चीवर है। कभी भाजपा और नरेंद्र मोदी का गुणगान करने में सक्रिय सावित्री के मंच पर न तो भाजपा के किसी नेता का चित्र था और न ही उनके उद्बोधन में किसी का जिक्र। समर्थकों ने साफ कर दिया कि अब उनकी मुहिम भाजपा सरकार के विरोध में है।

भाजपा ने दी साध्वी को पहचान
रविवार को कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित साध्वी की रैली ने कई संदेश दिए। कभी जिला पंचायत सदस्य रहीं साध्वी को जिस भाजपा ने विधायक व फिर सांसद बनाया, वह उसी के खिलाफ हैं। साध्वी ने एलान कर दिया कि वह उत्तर प्रदेश के जिलों और देशभर में संविधान और आरक्षण बचाने के लिए रैली करेंगी। साध्वी ने आंदोलन उस समय शुरू किया है, जब 2019 के लोस चुनाव की तैयारी चल रही है।

दलितों पर हमलों को हवा देकर बिगाड़ रहे माहौल
एक तरफ भाजपा सरकार दलित महापुरुषों का जीवन वृत्त पाठ्यक्रम में लागू करने के साथ ही उनके हितों को लेकर अभियान चला रही है, लेकिन साध्वी अपने तेवर से सब कुछ खारिज करने में जुट गई हैं। चूंकि वह भाजपा की सांसद हैं और अपनी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही हैं, चुनावी समीकरणों को देखते हुए इसे गंभीर माना जा रहा है। साध्वी समेत सभी वक्ताओं ने आंबेडकर की प्रतिमा व दलितों पर हो रहे हमले को हवा देकर भी माहौल बनाने की कोशिश की।

मोदी पर हमला, मायावती से परहेज नहीं
नमो बुद्धाय जन सेवा समिति के अध्यक्ष अक्षयवर नाथ कन्नौजिया ने भाजपा विरोधी पृष्ठभूमि पहले ही तैयार कर दी थी। कहा, बाबा साहब भारत को बुद्धमय व कांशीराम बहुजनमय बनाना चाहते थे और अब उसकी शुरुआत हो गई है। चाहे वामसेफ के मनीराम बहल हों या अन्य वक्ता दलितों के खिलाफ हो रही घटनाओं के लिए मोदी और योगी को जिम्मेदार ठहरा रहे थे।

संविधान से छेड़छाड़ प्रोन्नति में आरक्षण, घुड़सवारी करने पर दलित पर हमला, आंबेडकर की प्रतिमाएं तोड़ने जैसे मुद्दों पर मोदी को चेतावनी भी दे डाली कि यह सब महंगा पड़ेगा। आरक्षण बचाओ आंदोलन के नेता अवधेश वर्मा ने कहा कि ‘जो सरकार संविधान निर्माता के नाम में संशोधन कर सकती है उसे संविधान बदलने में हिचक नहीं होगी। भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।’

भाजपा के खिलाफ कुछ न बोलीं, पर बोलीं बहुत साध्वी
यह भी सच है कि साध्वी सावित्री ने जुबान से भाजपा के किसी नेता के बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन सरकार की नीतियों पर उनके तीखे विचार समर्थकों को उद्वेलित कर रहे थे। खास बात यह है कि साध्वी को बहुजन समाज के हित के नाम पर अब मायावती से भी कोई परहेज नहीं है।

मनुवाद पर हमला, आंबेडकर-कांशीराम का गुणगान
साध्वी की रैली में ज्यादातर वक्ताओं ने मनुवाद पर हमला करने के साथ ही आंबेडकर, गौतम बुद्ध और कांशीराम का गुणगान किया। निशाने पर उप्र की योगी और केंद्र की मोदी सरकार भी थी। दलित उत्पीड़न व आरक्षण के मुद्दे पर जज्बातों को उभारने के साथ ही दलितों से लामबंद होने का आह्वान था।

साध्वी- दलितों की सबसे बड़ी लड़इया
मंच पर बौद्ध धर्म के अनुयायी भी थे। सभी वक्ता सावित्री को दलितों की सबसे बड़ी लड़इया के रूप में प्रस्तुत करने में लगे थे। यही वजह है कि जब उन्हें सोने का मुकुट पहनाकर हाथों में तलवार दी गई तो भीड़ में आए उत्साही युवा जिंदाबाद के नारों के साथ थिरकने लगे थे। महाराष्ट्र से आयी गायिका सीमा ने तो मनुवादियों का मुंह करें काला.. गीत सुनाकर दो ढाई दशक पहले के दलित आंदोलन की याद भी दिला दी।’


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