राजस्थान विधानसभा चुनाव: बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के आमने-सामने होंगी कांग्रेस और भाजपा
राजस्थान में इस साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला हो सकता है। कांग्रेस ने जहां बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव में उतरने का औपचारिक एलान कर दिया है वहीं भाजपा भी बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।

नीलू रंजन, नई दिल्ली: राजस्थान में इस साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला हो सकता है। कांग्रेस ने जहां बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव में उतरने का औपचारिक एलान कर दिया है, वहीं भाजपा भी बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के मैदान में उतरने की तैयारी में है। दोनों ही पार्टियां बड़े नेताओं के अंदरूनी घमासान से होने वाले नुकसान से बचने के लिए मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान करने से बच रही हैं।
मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान नहीं!
दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान नहीं किया था। उस समय सचिन पायलट कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश की गई थीं। जीत के बाद कांग्रेस ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था। इसके पहले 2013 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में अशोक गहलोत ही कांग्रेस के चेहरे के रूप में सामने थे, जबकि भाजपा ने वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया था।
उसके पहले भी हर चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की ओर से कोई न कोई मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश किया जाता रहा है। यह पहला चुनाव होगा, जहां दोनों ही प्रमुख पार्टियां बिना चेहरे के मैदान में होंगी। भाजपा भले ही वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित नहीं करे, लेकिन पूरे चुनाव अभियान में पार्टी उनको केंद्र में रखने पर विचार कर रही है।
प्रदेश विधानसभा में हैं 200 सीटें
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि वसुंधरा राजे अब भी राजस्थान में पार्टी की सबसे बड़ी नेता हैं और मुख्यमंत्री पद के दूसरे दावेदार लोकप्रियता में उनका मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। 2003 में पहली बार मुख्यमंत्री बनी वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा ने 2013 में राजस्थान में 163 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। राजस्थान में विधानसभा की कुल 200 सीटें हैं। यही स्थिति कांग्रेस की भी है।
सचिन पायलट के बगावती तेवर को थामने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान नहीं करने का फैसला जरूर कर लिया, लेकिन पूरा चुनाव अभियान अशोक गहलोत के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रह सकता है। 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने अशोक गहलोत को कांग्रेस ने 2008 और 2018 में भी मुख्यमंत्री बनाया था। ध्यान देने की बात है कि 1998 के बाद से राजस्थान में हर पांच साल में कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता का हस्तांतरण होता रहा है।
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