गोपाल कृष्ण अग्रवाल/ विनय के श्रीवास्तव। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात अक्टूबर को सार्वजनिक जीवन में अपने 20 साल पूरे कर लिए। सुशासन, सेवा और समर्पण भाव से भरे ये वर्ष ऐतिहासिक हैं। पिछले दो दशकों में उनकी पहचान एक कड़ी मेहनत करने वाले मुख्यमंत्री, विशाल शख्सीयत और आर्थिकी सुधारवादी वैश्विक नेता की रही है। वह एक निर्वाचित सरकार के सबसे लंबे समय तक कार्यरत प्रमुख हैं। वह सबसे लंबे समय तक सेवारत गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी हैं। जब उन्होंने 2001 में गुजरात की कमान अपने हाथ में ली तो उस समय राज्य विनाशकारी भूकंप की त्रासदी को झेल रहा था। इसके बाद 2002 की हिंसा के कारण प्रदेश और आर्थिक संकट में आ गया था।   

राज्य को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने निवेश को आकर्षति करने और निवेशकों का विश्वास बनाने के लिए 2003 में एक राज्य स्तरीय सम्मेलन-वाइब्रेंट गुजरात, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया। उनके प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि 2004-05 से 2011-12 के दौरान गुजरात ने दो अंकों की शानदार वृद्धि दर दर्ज की। आज गुजरात देश के उच्च विकास दर वाले राज्यों और अग्रणी औद्योगिक राज्यों में से एक है। अनुमान है कि गुजरात की जीडीपी सात फीसद की दर से बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में 18.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। 

देश के लिए गुजरात विकास माडल हमेशा से चर्चा का एक विषय रहा है। गुजरात माडल ने 2014 के आम चुनाव में ऐसी धूम मचाई कि नरेंद्र मोदी केंद्रीय सत्ता के शिखर पर पहुंच गए। गुजरात की तरह ही मोदी ने केंद्र में भारतीय अर्थव्यवस्था को बदहाल हालत में पाया था। अर्थव्यवस्था लगातार दो वित्त वर्ष-2013 और 2014 में पांच फीसद से कम की दर से बढ़ रही थी। भारत की अर्थव्यवस्था की गणना विश्व की निचली पांच अर्थव्यवस्थाओं में हो रही थी।  

आर्थिक समस्याओं से निपटने और अर्थव्यवस्था को विकास की ओर ले जाने के लिए मोदी सरकार ने कई सुधारों की शुरुआत की है। प्रमुख आर्थिक सुधार हैं-दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, वस्तु एवं सेवा कर, श्रम सुधार, कृषि कानून, नई शिक्षा नीति। इनको मजबूती से लागू करने के कारण प्रधानमंत्री मोदी की पहचान सुधारवादी प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित हुई है। इन सुधारों के परिणामस्वरूप ही वैश्विक महामारी का सदमा ङोलने के बावजूद भी हमारी अर्थव्यवस्था ‘वी’ आकार के विकास की ओर अग्रसर है। हाल में मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने भारत की सावरेन रेटिंग को बदलकर निगेटिव से स्थिर कर दिया है। आउटलुक अपग्रेड एक सकारात्मक संकेत है, जो अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी सिद्धांतों के बारे में सरकारों के लगातार आकलन को दर्शाता है। महामारी के बाद हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक हो गई है। 

वर्ष 2014 में हमारे बैंक और वित्तीय संस्थान भारी एनपीए (गैर निष्पादित संपत्ति) से ग्रस्त थे। उनकी बैलेंस शीट में एनपीए की संख्या बहुत ज्यादा थी, जिससे उनकी ऋण देने की क्षमता प्रभावित हुई थी। निवेश को बढ़ने के लिए ऋण महत्वपूर्ण होता है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने खराब ऋणों की पहचान की और युद्ध स्तर पर इसके समाधान की दिशा में काम करने की पहल की। भगोड़ा अपराधी जायदाद अधिनियम, बेनामी संपत्ति अधिनियम और दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आइबीसी) से व्यापार तंत्र में क्रांति आ गई है। इनके द्वारा व्यवसायों के लिए आसान प्रवेश और निकास मार्ग प्रदान किया गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि आइबीसी के माध्यम से वित्त वर्ष 2018 में 49.6 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2019 में 45.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2020 में 45.5 प्रतिशत की राशि वसूली हो पाई है, जो पूर्ववर्ती कानूनों के तहत वसूली की तुलना में सबसे अधिक है। वित्तीय लेनदारों को इस कानून के कारण अधिक वसूली और बैलेंस शीट में एनपीए की राशि को कम करने में सफलता मिली है। वित्त वर्ष 2018 में सकल एनपीए 11.2 प्रतिशत के शिखर पर पहुंच गया था और वित्त वर्ष 2021 में यह 7.5 प्रतिशत रह गया है।  

सरकार ने जो प्रयास किए हैं, उन्हें वल्र्ड बैंक ने अपनी डूइंग बिजनेस रिपोर्ट (डीबीआर) में सराहा है। डीबीआर 2020 के अनुसार भारत ने दिवालिया मापदंडों को हल करने में अपनी रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई है। 2008 में यह रैंकिंग 103वें स्थान तथा 2017 में 136वें स्थान पर थी और 2020 में यह 52वें स्थान पर है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स के साल 2020 के संस्करण में दिवालियापन को हल करने में आसानी वाले देशों के रैंक में भारत 2020 में 47वें स्थान पर, 2018 में 91वें स्थान पर और 2017 में 111वें स्थान पर था। 

यूपीए-एक और यूपीए-दो सरकार के दौरान हुए विकास की तुलना में मोदी सरकार के दौरान आíथक विकास तेज रही है। एनडीए-दो और एनडीए-तीन की सरकारों का कार्यकाल देश के विकास के लिए अच्छा रहा है। भारत में ग्रीन फील्ड और ब्राउन फील्ड विनिर्माण में विदेशी निवेश का भारी प्रवाह देखने को मिल रहा है। भारत विनिर्माण निवेश के लिए गंतव्य स्थान के रूप में विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर आ गया है। कर्मयोगी की तरह चरैवेति के सिद्धांत को मानने वाले मोदी कहते हैं, बहुत कुछ और किया जाना है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal