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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 02, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मेधा पाटकर के खिलाफ मामला चलाने के लिए पासपोर्ट विभाग ने अनुमति मांगी

By Arun Kumar SinghEdited By:
Published: Thu, 02 Jan 2020 08:07 PM (IST)

मुंबई क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने विदेश मंत्रालय से नर्मदा बचाओ आंदोलन कार्यकर्ता मेधा पाटकर के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति मांगी है।

मेधा पाटकर के खिलाफ मामला चलाने के लिए पासपोर्ट विभाग ने अनुमति मांगी
मेधा पाटकर के खिलाफ मामला चलाने के लिए पासपोर्ट विभाग ने अनुमति मांगी

नई दिल्ली, प्रेट्र। मुंबई क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने विदेश मंत्रालय से नर्मदा बचाओ आंदोलन कार्यकर्ता मेधा पाटकर के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति मांगी है। सामाजिक कार्यकर्ता पर पासपोर्ट के लिए सौंपे गए आवेदन में अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देने का आरोप है।

आपराधिक मामला चलाने की अनुमति मांगी

पासपोर्ट कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि विभाग ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिख मेधा पाटकर के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने की अनुमति मांगी। 2017 में पासपोर्ट के लिए आवेदन सौंपते हुए उन्होंने अपने खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी छिपा ली थी।

दो साल की हो सकती है सजा

अधिकारी ने कहा कि मेधा पाटकर का पासपोर्ट स्वत: जब्त हो गया है। कारण बताओ नोटिस के जवाब में उन्होंने नौ दिसंबर को अपना पासपोर्ट सौंप दिया था। अधिकारी ने आगे बताया कि पासपोर्ट सौंप देने से वह खुद को मामले का सामना करने से नहीं बचा सकेंगी। अनुमति मिलने के बाद क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराएगा। इस मामले में दो साल कठिन कारावास की सजा या 5000 रुपये का जुर्माना या दोनों किया जा सकता है। जून 2019 में एक पत्रकार ने पाटकर के खिलाफ सच छिपाकर पासपोर्ट बनवाने की शिकायत की थी।

कोर्ट ने लगाया था सात हजार रुपये का जुर्माना 

पिछले साल दिल्‍ली की साकेत कोर्ट ने गवाह से जिरह (क्रॉस एग्जामिन) के स्थगन की मांग करने के चलते नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। खादी ग्रामोद्योग कमीशन के चेयरमैन वीके सक्सेना ने मेधा पाटकर के खिलाफ कोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की थी।

गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित मेधा ने सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित होने वाले लगभग 37 हजार गांवों के लोगों को अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ी है।