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    NDA VS UPA-3: मिशन 2024 में कौन साबित होगा '20', एनडीए या विपक्षी एकता... कौन है किस पर भारी?

    By Manish NegiEdited By: Manish Negi
    Updated: Thu, 22 Jun 2023 02:05 PM (IST)

    विपक्षी दल कल यानी शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना में अपनी एकता का प्रदर्शन करने वाले हैं। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर ये तैयारी की जा रही है। कांग्रेस टीएमसी आम आदमी पार्टी एनसीपी के अलावा तमाम विपक्षी दलों के नेता इसमें शामिल होने आ रहे हैं। विपक्षी एकता और एनडीए दोनों के पास कितनी ताकत है वो आपको बताते हैं।

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    NDA VS UPA-3: मिशन 2024 में कौन साबित होगा '20'

    नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। बिहार की राजधानी पटना में 23 जून को विपक्षी दलों के नेताओं का सबसे बड़ा मंच लगने जा रहा है। विपक्षी एकता की महाबैठक होने वाली है। बैठक में जदयू, आरजेडी, कांग्रेस, टीएमसी और आम आदमी पार्टी के अलावा कई दलों के नेता शामिल होंगे। मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहे तमाम विपक्षी दल कल पटना के मंच से सियासी हुंकार भरेंगे। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले ये विपक्षी एकता का ट्रेलर होगा।

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    विपक्षी एकता के मिशन की कमान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने हाथों में ली है। शुक्रवार को होने वाली इस बैठक में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए रणनीति पर चर्चा होगी। बैठक में शामिल होने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं का पटना पहुंचना शुरू हो गया है।

    NDA VS UPA-3 हुई लड़ाई

    मिशन 2024 की लड़ाई में जीत के लिए मामला अब NDA VS UPA-3 गल रहा है। एक तरफ एनडीए, जबकि दूसरी तरफ तमाम विपक्षी दल। हालांकि, बीजद के अलावा कई दलों ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन फिर भी बीजेपी विपक्षी दलों के महाजुटान को हल्के में नहीं लेना चाह रही है। यही वजह है कि एनडीए अपना कुनबा बढ़ाने की तैयारी में है।

    कौन-से दल, नेता होंगे बैठक में शामिल?

    मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष, राहुल गांधी कांग्रेस नेता, अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, ममता बनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी), जदयू, राजद, हेमंत सोरेन, महबूबा मुफ्ती और उमर अबदुल्ला। इसके अलावा सीपीआई, सीपीएम और डीएमके नेता भी इसमें शामिल होने आ रहे हैं।

    एनडीए के साथ-साथ कौन कौन?

    शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट), एआईएडीएमके, लोक जनशक्ति पार्टी, अपना दल (सोनेलाल), एनपीपी, एमएनएफ, एनपीएफ, एजेएसयू, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले), एजीपी, पीएमके, तमिल मनीला कांग्रेस, यूपीपीएल, अजासू और एआईएनआरसी।

    कांग्रेस की मुश्किल

    विपक्षी एकता की कवायद को अमलीजामा पहनाने के आगे कुछ पेंच भी हैं। क्योंकि, कुछ विपक्षी दल ऐसे हैं जो कांग्रेस को अपने राज्य से बाहर रखना चाहते हैं। टीएमसी, आम आदमी पार्टी, सपा और भारत राष्ट्र समिति की शर्त है कि कांग्रेस उनके राज्य में चुनाव न लड़े।

    कांग्रेस की किन राज्यों में है बीजेपी से सीधी टक्कर?

    गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और असम। इसके अलावा कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, पंजाब और हरियाणा। सवाल उठता है क्या कांग्रेस विपक्षी एकता के साथ गठबंधन के लिए समझौते करने के लिए तैयार होगी। वो भी तब जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं।