रायपुर, राज्य ब्यूरो। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी राजभवन और सरकार के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। यहां करीब तीन महीने पहले कुलपति की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल के अधिकार में कटौती से शुरू हुआ विवाद अब राजभवन के सचिव की पदस्थापना तक पहुंच गया है। सरकार ने बुधवार को राजभवन में नए सचिव की पदस्थाना का आदेश जारी किया। बस्तर के कमिश्नर रहे अमृत खलको को कृषि विभाग का सचिव बनाते हुए राज्यपाल के सचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई। खलको गुरुवार को दो बार राजभवन गए, लेकिन ज्वाइन नहीं कर पाए। शुक्रवार को सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री रविंद्र चौबे और मोहम्मद अकबर राजभवन जाकर राज्यपाल अनुसुईया उइके से सौजन्य की है, लेकिन खलको अब तक राजभवन में पदभार संभाल नहीं पाए हैं।

नाराज राज्यपाल ने उच्च शिक्षा से जुड़े आठ विधेयक रोके

राजभवन और सरकार के बीच टकाराव कुलपति की नियुक्ति से शुरू हुआ। राज्यपाल ने कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति का आदेश जारी किया। इसपर सरकार की तरफ से कहा गया कि राज्यपाल ने अपनी मर्जी से कुलपति की नियुक्ति की है। इसके बाद सरकार विधानसभा में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर विधेयक ले आई। इसमें कुलपति की नियुक्ति का अधिकार सरकार के पास चला गया। इससे नाराज होकर राज्यपाल ने आठ विधेयकों को रोक रखा है। इन विधयेकों को पास कराने के लिए पांच मंत्री राज्यपाल से मिलने पहुंचे, लेकिन राज्यपाल ने विधि विशेषज्ञों की राय लेने का हवाला देकर मंत्रियों को वापस कर दिया। इसके बाद मरवाही ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाए जाने पर राज्यपाल ने आपत्ति करते हुए सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी।

राजभवन की बैठक में नहीं पहुंचे गृहमंत्री

प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर राज्यपाल ने पिछले बुधवार को गृह विभाग की समीक्षा बैठक राजभवन में बुलाई थी। विभाग ने गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के क्वारंटाइन होने की जानकारी देते हुए बैठक स्थगित करने का आग्रह किया। राज्यपाल ने इसे स्वीकार कर लिया, लेकिन उसी दिन साहू मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई गृह विभाग की बैठक में शामिल हुए। इसे भाजपा ने मुद्दा बना लिया है।

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