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    'मुझे अपना चेहरा छिपाना पड़ता है...' संसद में नितिन गडकरी ने क्यों कहा ऐसा?

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में जानकारी दी कि देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में 1.78 लाख लोगों की जान जाती है। उन्होंने कहा कि जब मैं सड़क दुर्घटनाओं पर चर्चा करने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लेते हूं तो मैं अपना चेहरा छुपा लेता हूं। चर्चा के दौरान एक सप्लीमेंट्री प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह कहा।

    By Jagran News Edited By: Piyush Kumar Updated: Thu, 12 Dec 2024 06:13 PM (IST)
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    देश में बढ़ती सड़क हादसें की संख्या को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चिंता जाहिर की।(फोटो सोर्स: एएनआई)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। Road Accident Cases in India। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश में सड़क हादसों में हुई वृद्धि को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब मैं पहली बार सड़क परिवहन मंत्री बना था तो सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य रखा था। दुर्घटनाओं की संख्या में कमी को तो भूल जाइए, मुझे ये स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ ही गई है।

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    मुझे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में चेहरा छिपाना पड़ता है: नितिन गडकरी

    उन्होंने आगे कहा, "जब मैं सड़क दुर्घटनाओं पर चर्चा करने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लेता हूं तो मुझे अपना चेहरा छिपाना पड़ जाता है। सड़क दुर्घटना पर चर्चा के दौरान एक सप्लीमेंट्री प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह कहा।"

    नितिन गडकरी ने कहा कि देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में 1.78 लाख लोगों की जान जाती है और 60% पीड़ित 18-34 वर्ष की आयु के होते हैं।

    सड़क हादसों में जान गंवाने में यूपी का सबसे खराब रिकॉर्ड

    उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में 23,000 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं की वजह से मारे गए। लोग मारे गए हैं, इसके बाद तमिलनाडु में 18,000 से अधिक लोगों की मौत हुई हैं। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 15,000 से अधिक है, इसके बाद मध्य प्रदेश में 13,000 से अधिक मौत हुई हैं।

    शहरों की बात करें तो दिल्ली में सालाना 1,400 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में होती है। इसके बाद बेंगलुरु में 915 मौत हुई। शहरों में दिल्ली सालाना 1,400 से अधिक मौतों के साथ चार्ट में सबसे आगे है, इसके बाद 915 मौतों के साथ बेंगलुरु है। गडकरी ने कहा कि कई ट्रक लेन अनुशासन का पालन नहीं करते हैं, जिसकी वजह से हादसे हुए थे।

    ड्राइविंग लाइसेंस नियम को सख्त करने की जरूरत

    उन्होंने सांसदों से कहा कि उन्हें भी सड़क हादसों को रोकने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करना चाहिए। परिवहन विभाग के सहयोग से सभी स्कूलों-संस्थानों आदि में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करें। उन्होंने आगे जानकारी दी कि सड़क हादसों के शिकार 30 फीसदी लोगों की मौत सही समय पर जीवन रक्षक उपचार नहीं मिल पाने की वजह से हो जाती है।  ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर सख्ती लाने की भी जरूरत है।

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