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    नकवी ने याद दिलाया अंसारी के कार्यकाल का वो किस्सा, बोले- लेकिन हम नहीं लाए अविश्वास प्रस्ताव

    Updated: Wed, 11 Dec 2024 10:34 PM (IST)

    कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर सदन में सबसे बड़ा व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि वह अपनी अगली पदोन्नति के लिए सरकार के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उपराष्ट्रपति पर कई आरोप लगाए। विपक्ष के आरपों पर भाजपा ने करारा पलटवार किया।

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    सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हंगामा (File Photo)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष ने सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इस आरोप के साथ दिया है कि उनका व्यवहार पक्षपाती है। सरकार को मदद पहुंचाते हैं और विपक्ष को अवसर नहीं देते। इसी परिप्रेक्ष्य में पूर्व संसदीय कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस को तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के समय की याद दिलाई है।

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    मनमोहन सिंह पर भरोसा नहीं

    नकवी का साफ कहना है कि तब अंसारी का सरकार के खिलाफ पक्षपाती रवैया था। सरकार के कामकाज भी प्रभावित किए जाते थे। लेकिन फिर भी तब भाजपा कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाई थी। सांसद सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि जिस कांग्रेस पार्टी को अपने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भरोसा नहीं रहा हो, उससे उम्मीद ही क्या की जा सकती है।

    उपसभापति भी कांग्रेस के ही रहमान

    गौरतलब है कि हामिद अंसारी मोदी सरकार के कार्यकाल में तीन साल तक उपराष्ट्रपति रहे थे। वह अगस्त 2017 में रिटायर हुए थे। नकवी तब संसदीय कार्य मंत्रालय का भी जिम्मा संभाल रहे थे। उस वक्त के माहौल को याद करते हुए नकवी कहते हैं कि उस समय अंसारी का व्यवहार भी असहयोगात्मक था और उपसभापति भी कांग्रेस के ही रहमान खान थे।

    भाजपा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाई

    नकवी कहते हैं कि उस वक्त राज्यसभा में आने वाले अधिकतर बिल अटक जाया करते थे। क्योंकि विपक्ष शोर करता था और अंसारी का कहना था कि वह शोर शराबे में विधेयक पास नहीं कराएंगे। जबकि उसके पहले कांग्रेस काल में शोर शराबे में कई विधेयक पारित कराए गए थे। लेकिन भाजपा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाई।

    नेता चेयर पर किताब फेंकते हैं

    जबकि सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर ही सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि धनखड़ के कार्यकाल से पहले विपक्षी सदस्यों का रवैया कभी इतना खराब भी नहीं रहा था। इसी काल में यह देखा गया कि विपक्ष के नेता चेयर पर किताब फेंकते हैं।

    गठबंधन में मचा तूफान

    इसी कार्यकाल में कुछ विपक्षी सदस्यों ने माइक तक तोड़कर चेयर की ओर फेंकी। सदन की मेज पर चढ़े और वह चाहते हैं कि कार्रवाई भी न हो। सच्चाई यह है कि इंडी गठबंधन में मचे तूफान के बाद आपसी होड़ के लिए यह मुद्दा लाया गया है जो टिकेगा नहीं।

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