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    मध्य प्रदेश में भाजपा को झटका, दतिया जिले के पूर्व विधायक प्रभाकर ने पार्टी से दिया इस्तीफा

    By Dhyanendra SinghEdited By:
    Updated: Thu, 16 Jul 2020 09:15 PM (IST)

    गुरुवार को दिए इस्तीफे में प्रभाकर ने लिखा कि पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और अपमान किया जा रहा है। पार्टी में तानाशाही हो गई है।

    मध्य प्रदेश में भाजपा को झटका, दतिया जिले के पूर्व विधायक प्रभाकर ने पार्टी से दिया इस्तीफा

    दतिया, जेएनएन। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में गुरुवार को भाजपा को बड़ा झटका लगा है। सेंवढ़ा विधानसभा सीट से विधायक रहे रामदयाल प्रभाकर ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भेजे इस्तीफे में उन्होंने संगठन पर अनदेखी, उपेक्षा सहित तानाशाही के आरोप लगाए हैं।

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    मालूम हो, प्रभाकर सेंवढ़ा सीट से 1993 और 2003 में दो बार विधायक रह चुके हैं। साथ ही वे जिला महामंत्री और अनुसूचित जाति मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य के पद पर भी थे।

    गुरुवार को दिए इस्तीफे में प्रभाकर ने लिखा कि पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और अपमान किया जा रहा है। पार्टी में तानाशाही हो गई है। जनहित की बात का विरोध किया जाता है। वह पार्टी के प्रदेश स्तर के संगठन से दुखी हैं, क्योंकि संगठन के बड़े पद पर बैठे लोग खुद निर्णय न लेकर अन्य बड़े नेताओं के इशारे पर काम करते हैं। जब इसकी शिकायत की जाए तो आम कार्यकर्ता की अनदेखी होती है। केंद्रीय नेतृत्व भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इससे वह इस्तीफा दे रहे हैं।

    24 विधानसभा सीटों पर होनें हैं उपचुनाव

    मध्य प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक और भाजपा के असंतुष्ट नेताओं की खेमेबंदी सतह पर आ गई है। इसको लेकर ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया 'महाराज' और भाजपा के नाराज खेमा राज्‍य में सुर्खियों में है। ऐसे में दोनों की खेमेबाजी कुछ समय बाद होने वाले उपचुनाव को प्रभावित कर सकती है। चूंकि मध्‍य प्रदेश में शिवराज की स्थायी सरकार के लिए उप चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना भाजपा के लिए जरूरी है इसलिए शीर्ष नेतृत्व का संतुलन बनाने का दबाव बढ़ा है। आपसी कड़वाहट को हर हाल में रोकने की हिदायत दी गई है।