नई दिल्ली (जागरण स्‍पेशल)।  मोदी सरकार के ‘भारत नेट’ प्रोजेक्ट ने ब्रॉडबैंड अर्थात हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के जरिए डिजिटल इंडिया मिशन को देश के लगभग हर गांव और घर तक पहुंचा दिया है। इस प्रोजेक्ट को मूलत: संप्रग सरकार ने लांच किया था, लेकिन मोदी सरकार ने न केवल इसे नया नाम दिया, बल्कि रफ्तार के साथ मुकाम तक ले आई है। भारत नेट की शुरुआत अक्टूबर, 2011 में नेशनल ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) के नाम से हुई थी। इसका मकसद देश की ढाई लाख ग्राम पंचायतों को 100 एमबीपीएस स्पीड वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना था। वर्ष 2014 तक इसमें कोई खास काम नहीं हुआ था। लिहाजा मोदी सरकार ने 2015 में इसे ‘भारत नेट’ के नए नाम के साथ नया रूप देकर इंटरनेट को हर घर, हर व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। इसके लिए डेढ़ लाख पंचायतों में दस किलोमीटर ओएफसी और बिछाया जा रहा है।

कराया गया सस्ता बैंडविड्थ उपलब्ध 
किफायती इंटरनेट के लिए दूरसंचार कंपनियों को 75 फीसद सस्ता बैंडविड्थ उपलब्ध कराया गया है। भारत नेट को कुल तीन चरणों में लागू किया जा रहा है। पहले चरण में कस्बों में 15 हजार तथा गांवों में 11 हजार वाईफाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं। इससे इन क्षेत्रों में वाईफाई हॉटस्पॉट की कुल संख्या बढ़कर 38 हजार हो गई है। अंतत: मोबाइल कंपनियों के जरिए वाईफाई हॉटस्पॉट की इस संख्या को सात लाख तक पहुंचाया जाएगा। दूसरे चरण में सरकार ने कंपनियों का सहयोग लिया है। असम, मप्र, उप्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, राजस्थान तथा सिक्कम में बीएसएनएल को, जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और ओडिशा में पावरग्रिड को केबल बिछाने का दायित्व सौंपा गया है। 

ओएफसी बिछाने के समझौते
भारती एयरटेल, आइडिया सेल्यूलर, वोडाफोन और रिलायंस जियो अपनी तरफ से ये काम कर रही हैं। दूरसंचार मंत्रलय ने सात राज्यों के साथ ओएफसी बिछाने के समझौते किए हैं। इनमें झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु शामिल हैं। उम्मीद है कि दूसरा चरण दिसंबर, 2018 में ही पूरा हो जाएगा। तीसरा चरण में 2019-23 के अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाने हैं। भारत नेट के तहत अब तक 1,09,926 ग्राम पंचायतों में 2,54,895 किलोमीटर ओएफसी बिछाया जा चुका है। इसी के साथ प्रति पंचायत 2-7 हॉटस्पॉट के हिसाब से 6-7 लाख हॉटस्पॉट लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। टेलीकॉम कंपनियों को 3600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि पुराने हॉटस्पॉट को कारगर बनाने के लिए दी जा रही है।

अर्थव्यवस्था को लाभ
भारत नेट को मोदी सरकार के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। इससे ई-गवर्नेस, ई-बैंकिंग, ई-हेल्थ जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने और भ्रष्टाचार मिटाने में मदद मिलेगी। स्वदेशी उपकरणों का उपयोग होने से ‘मेक इन इंडिया’ को भी इससे बढ़ावा मिल रहा है। संचार मंत्री मनोज सिन्हा के अनुसार अभी भारत में करीब 43 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं। नई दूरसंचार नीति में 2020 तक इनकी संख्या 60 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत नेट से यह आसान होगा। संचार सचिव अरुणा सुंदरराजन के अनुसार भारत नेट से देश के सकल घरेलू उत्पाद में 3.3 फीसद अर्थात साढ़े चार लाख करोड़ रुपये की वृद्धि होने का अनुमान है। 14सुस्त इंटरनेट को हाईस्पीड में बदलने व घर-घर पहुंचाने की कवायद 14मोदी सरकार के लिए गेम चेंजर मानी जा रही है यह परियोजना। 

ये हैं देश के कुछ डिजिटल गांव 

गुजरात के सबरकांत जिले में स्थित अकोदरा गांव देश का पहला डिजि‍टल गांव है। इस गांव की आबादी 1,191 लोगों की है। यहां करीब 250 घर हैं। इस गांव को ICICI बैंक ने डिजिटल विलेज प्रोजेक्‍ट के तहत 2015 में एडोप्‍ट किया था।

फरवरी 2017 में दिल्ली हरियाणा सीमा के नजफगढ़ के गांव सुरखपुर को 'डिजिटली पेमेंट एनेबल्ड' घोषित किया गया था। केंद्र सरकार की 'डिजिटल इंडिया मुहिम' के बाद इसको इस योजना से जोड़ा गया था। 

बिहार के शेखपुरा जिले के कोरमा थाने का अवगिल गांव पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है।गांव की पूरी आबादी बैंकिंग व्यवस्था जुड़ गई है। गांव में लेन देन की पूूरी प्रक्रिया डिजिटल है। इस गांव की कुल आबादी तीन हजार के करीब है। पहले से ही इस गांव में 2500 लोगों के बैंक अकाउंट थे। 

पीएम के डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम के तहत गोरखपुर जिले का पहला डिजिटल गांव है धनौड़ा खुर्द। इस गांव की आबादी 5000 है। 

बनारस से सटे मिसिरपुर गांव को एक नई पहचान मिली। 21 दिसंबर को इसे पहला कैशलेस डिजिटल गांव घोषित किया गया। कोलकाता-दिल्ली हाईवे से सटा ये गांव काफी सुविधा सपंन्न है। 

पंजाब केसरी लाला लाजपत राय का पैतृक गांव ढुडी भी पंजाब का डिजिटल गांव है। पंजाब नेशनल बैंक ने इस गांव को गोद लिया था।

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले के बस्तर ब्लॉक का बालेंगा गांव प्रदेश में पहला डिजिटल गांव बन गया है।

मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया मुहिम के बाद हरिद्वार के बहादराबाद ब्लॉक का गांव पंजनहेड़ी ब्राडबैंड कनेक्टिविटी से पूरी तरह जुड़ा। ब्राडबैंड कनेक्टिविटी से जुड़ने वाला यह उत्तर भारत का पहला गांव है। 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 28 किलोमीटर दूर माल ब्लॉक का लतीफपुर गांव की पहचान  डिजिटल गांव के रूप में ही होती है। 

राजस्थान के एक छोटे सा गांव नानी राजस्थान के जिला मुख्यालय सीकर से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव की जनसंख्‍या महज 3000 है। नानी गांव देश की डिजिटल इंडिया की पहली ग्राम पंचायत बन गई हैं। ये देश की पहली ग्राम पंचायत हैं जिसका नाम गूगल प्ले स्टोर पर है। 

भारत सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने बोकारो जिले के दो पंचायतों को डिजिटल गांव का दर्जा दिया है। यह गांव चंदनिकयारी प्रखंड के चंदनिकयारी पूर्वी पंचायत व चास प्रखंड का कुर्रा पंचायत है।

किशनगढ़ के पास स्थित नयागांव अजमेर जिले का पहला कैशलेस गांव है। 

झारखंड राज्य का पहला कैशलेश गांव टाटीझरिया है। टाटीझरिया गांव की कुल आबादी 800 है। 

राजस्थान में झुंझुनूं जिले का चंवरा गांव डिजीटल गांव बनने जा रहा है।
 

Posted By: Kamal Verma

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