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    No Confidence Motion: अब तक देश के संसदीय इतिहास में कुल 28 बार लाया गया अविश्वास प्रस्ताव

    By AgencyEdited By: Amit Singh
    Updated: Thu, 10 Aug 2023 11:57 PM (IST)

    पहली बार अविश्वास प्रस्ताव अगस्त 1963 में कांग्रेस नेता आचार्य कृपलानी द्वारा सबसे लंबे समय तक रहे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ लाया गया था। यह 1962 के युद्ध में चीन से हार के तुरंत बाद लाया गया था। 62 सांसदों ने इसका समर्थन जबकि 347 ने विरोध किया था। उनके खिलाफ केवल एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।

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    मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गुरुवार को ध्वनि मत से गिर गया।

    नई दिल्ली, पीटीआई: नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गुरुवार को ध्वनि मत से गिर गया। यह निचले सदन में लाया गया 28वां ऐसा अविश्वास प्रस्ताव था। इससे पिछले सभी प्रस्ताव या तो गिर गए या अनिर्णायक रहे।

    1. अगस्त 1963: पहली बार अविश्वास प्रस्ताव अगस्त 1963 में कांग्रेस नेता आचार्य कृपलानी द्वारा सबसे लंबे समय तक रहे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ लाया गया। यह 1962 के युद्ध में चीन से हार के तुरंत बाद लाया गया था। 62 सांसदों ने इसका समर्थन, जबकि 347 ने विरोध किया था। उनके खिलाफ केवल एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।
    2. सितंबर 1964: लाल बहादुर शास्त्री की सरकार के खिलाफ एन सी चटर्जी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। 18 सितंबर 1964 को मतदान हुआ और 307 सांसदों ने प्रस्ताव के खिलाफ, जबकि 50 ने पक्ष में मतदान किया था, जिससे प्रस्ताव गिर गया।
    3. मार्च 1965: केंद्रपाड़ा के सांसद एस एन द्विवेदी ने लाल बहादुर शास्त्री सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। इसका 44 सांसदों ने समर्थन किया था, जबकि 315 ने इसके खिलाफ मतदान किया था। 16 मार्च 1965 को बहस हुई और प्रस्ताव गिर गया।
    4. अगस्त 1965: स्वतंत्र पार्टी के पूर्व सांसद एमआर मसानी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 26 अगस्त 1965 को मतदान हुआ और 66 सांसदों ने समर्थन, जबकि 318 ने प्रस्ताव का विरोध किया।
    5. अगस्त 1966: इंदिरा गांधी के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद हिरेंद्रनाथ मुखर्जी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इसका 61 सांसदों ने समर्थन, जबकि 270 ने विरोध किया था, जिससे प्रस्ताव गिर गया। सबसे अधिक 15 बार अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लाया गया।
    6. नवंबर 1966: इंदिरा गांधी की सरकार को एक साल में दूसरे अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था। इसे भारतीय जनसंघ के नेता यूएम त्रिवेदी ने पेश किया। इसका 36 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 235 ने इसके खिलाफ मतदान किया था, जिससे प्रस्ताव गिर गया।
    7. मार्च 1967: भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। 20 मार्च 1967 को 162 सांसदों ने सरकार के खिलाफ वोट किया था, जबकि 257 ने समर्थन किया था।
    8. नवंबर 1967: मधु लिमये की ओर से इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। 24 नवंबर को मतदान हुआ। प्रस्ताव का 88 सांसदों ने समर्थन और 215 ने विरोध किया था।
    9. फरवरी 1968: बलराज मधोक ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव लाया था। 28 फरवरी को मतदान हुआ। 75 सांसदों ने समर्थन और 215 ने विरोध में मतदान किया।
    10. नवंबर 1968: भारतीय जनसंघ के कंवर लाल गुप्ता की ओर से इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 13 नवंबर को मतदान हुआ। 90 सांसदों ने समर्थन और 222 ने विरोध किया था।
    11. फरवरी 1969: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मा‌र्क्सवादी) के नेता पी राममूर्ति द्वारा इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया। 86 सांसदों ने समर्थन और 215 ने विरोध किया था।
    12. जुलाई 1970: मधु लिमये द्वारा इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया। प्रस्ताव का 137 सांसदों ने समर्थन, जबकि 243 ने विरोध किया था।
    13. नवंबर 1973: सीपीआइ-एम सांसद ज्योतिर्मय बसु ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव लाया था। 251 सांसदों ने इसका विरोध किया था, जबकि 54 ने समर्थन किया था, जिससे प्रस्ताव गिर गया।
    14. मई 1974: ज्योतिर्मय बसु ने फिर इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। यह 10 मई 1974 को ध्वनि मत से गिर गया।
    15. जुलाई 1974: ज्योतिर्मय बसु ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ इसी वर्ष फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया। 25 जुलाई 1974 को वोटिंग हुई। 63 सांसदों ने समर्थन, जबकि 297 ने विरोध किया। इससे प्रस्ताव गिर गया।
    16. मई 1975: आपातकाल लागू होने से पहले ज्योतिर्मय बसु द्वारा फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। नौ मई 1975 को प्रस्ताव ध्वनि मत से गिर गया।
    17. मई 1978: लोकसभा में विपक्ष के तत्कालीन नेता सी एम स्टीफन द्वारा मोरारजी देसाई सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। 11 मई 1978 को प्रस्ताव गिर गया।
    18. जुलाई 1979: वाईबी चव्हाण द्वारा मोरारजी देसाई सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। बहस बेनतीजा रही, फिर भी मोरारजी देसाई ने पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से संन्यास ले लिया। यह एकमात्र मौका था जब अविश्वास प्रस्ताव के बाद कोई सरकार गिरी थी, जबकि प्रस्ताव पर कोई मतदान नहीं हुआ था।
    19. मई 1981: जार्ज फर्नांडिस द्वारा इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। नौ मई 1981 को वोटिंग हुई। 92 सांसदों ने समर्थन और 278 ने विरोध किया था। प्रस्ताव गिर गया।
    20. सितंबर 1981: सीपीआइ-एम सांसद समर मुखर्जी द्वारा इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया। 17 सितंबर 1981 को वोटिंग हुई और 86 सांसदों ने समर्थन, जबकि 297 ने विरोध किया था।
    21. अगस्त 1982: कांग्रेस के पूर्व नेता एचएन बहुगुणा द्वारा इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। उन्होंने आपातकाल लागू होने पर पार्टी छोड़ दी थी। 16 अगस्त 1982 को वोटिंग हुई और 112 सांसदों ने समर्थन और 333 ने विरोध किया था। प्रस्ताव गिर गया था।
    22. दिसंबर 1987: सी. माधव रेड्डी द्वारा राजीव गांधी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। 11 दिसंबर 1982 को प्रस्ताव ध्वनि मत से गिर गया।
    23. जुलाई 1992: जसवंत सिंह द्वारा पी वी नरसिम्हा राव सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 17 जुलाई 1992 को वोटिंग हुई। 225 सांसदों ने समर्थन, जबकि 271 ने प्रस्ताव का विरोध किया था, जिससे प्रस्ताव गिर गया।
    24. दिसंबर 1992: उसी वर्ष दूसरा अविश्वास प्रस्ताव नरसिम्हा राव के विरुद्ध भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लाया गया था। 21 दिसंबर 1992 को मतदान हुआ। 111 सांसदों ने समर्थन और 336 ने इसका विरोध किया था। यह प्रस्ताव गिर गया था।
    25. जुलाई 1993: नरसिम्हा राव सरकार के खिलाफ तीसरा अविश्वास प्रस्ताव अजोय मुखोपाध्याय द्वारा लाया गया। यह प्रस्ताव गिर गया। इसका 265 सांसदों ने विरोध किया था, जबकि 251 ने समर्थन किया था।
    26. अगस्त 2003: सोनिया गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। 19 अगस्त 2003 को प्रस्ताव गिर गया। 314 सांसदों ने प्रस्ताव का विरोध, जबकि 189 ने समर्थन किया था।
    27. जुलाई 2018: तेलुगु देशम पार्टी के केसिनेनी श्रीनिवास ने नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इसे 20 जुलाई 2018 को मतदान के लिए रखा गया। 135 सांसदों ने समर्थन, जबकि 330 ने विरोध किया था, जिससे प्रस्ताव गिर गया था।

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