नई दिल्ली [जागरण स्‍पेशल]। अपनी कायराना हरकतों से बाज न आने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत की फिलहाल पूरी तैयारी है। इसका अंदाजा पाकिस्तान से सटे सभी सीमावर्ती सैन्य ठिकानों और अग्रिम चौकियों पर रातों-रात पहुंचाई गई रसद सामग्री और जरूरी सामग्रियों से लगाया जा सकता है। जहां तीन महीने तक के लिए खाने-पीने का सामान पहुंचा दिया गया है। साथ ही जवानों को भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

तैयारियों को दिया जा रहा है अंतिम रूप

सैन्य ठिकानों पर भारत की ओर से रसद सामग्री की यह खेप पिछले दो दिनों में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बढ़ी हलचल के बाद पहुंचाई गई है। सूत्रों की मानें तो भारतीय हमले से बौखलाए पाकिस्तान की हरकतों को देखते हुए इन तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। तैयारियों के इसी क्रम में अग्रिम सैन्य चौकियों और ठिकानों पर जवानों के खाने-पीने सहित जरूरी सामग्रियों को जमा कर दिया गया है। ताकि युद्ध जैसी किसी भी स्थिति के बनने पर इस समस्या से उन्हें न जूझना पड़े। इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल सहित ईंधन का भंडारण भी कर लिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के साथ अपने पुराने अनुभवों के आधार पर भारत ने यह कदम उठाया है। खासकर कारगिल युद्ध के दौरान उसकी ओर से लड़ाई को लंबा खींचने की हरकत से निपटने के लिए यह बंदोबस्त किया गया है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने बुधवार को भारत के सैन्य ठिकानों को जिस तरीके से निशाना बनाया गया है, उसका भारत की ओर से भी करारा जवाब दिया जा सकता है। ऐसे में सीमा पर कभी भी तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।

रक्षा जरूरतों की ईंधन आपूर्ति

पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने के चलते भारतीय तेल कंपनियों ने प्रभावी रणनीति के तहत रक्षा और सामरिक जरूरतों की ईंधन आपूर्ति के लिए 500 टैंकरों को रवाना कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के तहत पाकिस्तान के साथ लगती सीमा पर स्थित रक्षा प्रतिष्ठानों की जरूरतों को सबसे ऊपर रखा गया है। बता दें कि पुलवामा हमले के बाद तुरंत बाद से ही तेल कंपनियों ने जम्मू-कश्मीर और सीमाई क्षेत्रों में ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करनी शुरू कर दी थी।

अधिकारी ने बताया कि नए हालातों में जेट ईंधन (एटीएफ), डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का 10 दिन से अधिक स्टॉक पूरा करने के लिए 500 से अधिक तेल टैंकरों को जम्मू-कश्मीर और सीमाई क्षेत्रों पर भेजा गया है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि देश में खपत होने वाले 190 मिलियन टन ईंधन के मुकाबले में रक्षा सेवाओं की जरूरत बहुत कम है, लेकिन जम्मू-कश्मीर और सीमाई क्षेत्रों में निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कसरत की जा रही है। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम और हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम वायु सेना के लड़ाकू विमानों के साथ ही टैंकों, ट्रकों और अन्य वाहनों के लिए डीजल और अन्य ईंधन की आपूर्ति करते हैं।

रक्षा उपकरण खरीद की मंजूरी

रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए करीब 2700 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह जानकारी बुधवार को अधिकारियों ने दी। रक्षा खरीद के लिए शीर्ष नीति निर्धारण निकाय परिषद की बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने की। इसमें नौसेना के लिए तीन कैडेट प्रशिक्षण पोत खरीदने की मंजूरी दी गई। इसका इस्तेमाल महिला अधिकारियों सहित प्रशिक्षु अधिकारियों को बुनियादी समुद्र प्रशिक्षण मुहैया कराने के लिए किया जाएगा। यह पोत हॉस्पिटल शिप ड्यूटी का निर्वाह करने में सक्षम होगा। यह मानवीय सहायता और आपदा राहत मुहैया कराएगा। इसका इस्तेमाल तलाशी एवं बचाव अभियान और गैर युद्ध विस्थापन अभियान में भी किया जा सकेगा।

अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर कामयाबी

पुलवामा हमले के बाद भारत एक बार फिर पाकिस्‍तान को अलग-थलग करने में काफी हद तक कामयाब हुआ है। पूर्वी चीन के शहर वुझेन में रूस, भारत और चीन (आरआइसी) विदेश मंत्रियों की बैठक में यह प्रतिबद्धता दिखाई दी। इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि हम सभी प्रकार के आतंकवाद से संयुक्त रूप से मुकाबला करने के लिए सहमत हैं। यह काम करीबी नीतिगत समन्वय और व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से किया जाएगा। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण आतंक और कट्टरता की नर्सरी को नष्ट करना है। चीन का यह बयान भारत के लिहाज से काफी अहम इसलिए भी है क्‍योंकि यह पाकिस्तान में जैश के ठिकानों पर भारत के हवाई हमलों को न्यायसंगत ठहराता है। इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मौजूद थे।

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Posted By: Kamal Verma

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