नई दिल्ली[हरिकिशन शर्मा]। फ्लैट खरीददारों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली-एनसीआर सहित महानगरों में 60 वर्गमीटर और छोटे शहरों (नॉन-मेट्रो सिटी) में 90 वर्गमीटर कारपेट एरिया और 45 लाख रुपये तक मूल्य वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट पर मात्र एक प्रतिशत जीएसटी लगेगा। वहीं इससे अधिक क्षेत्रफल और कीमत वाले अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट पर सिर्फ पांच प्रतिशत जीएसटी देना होगा।

आवासीय परियोजनाओं पर जीएसटी की ये दरें एक अप्रैल 2019 से प्रभावी होंगी। खास बात यह है कि जो परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं, उन पर भी ग्राहकों को इसका लाभ मिलेगा।केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 33वीं बैठक में रविवार को इस आशय का फैसला किया गया। काउंसिल हालांकि लॉटरी पर जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाने के संबंध में कोई निर्णय नहीं कर पायी। अब अगली बैठक में लॉटरी पर जीएसटी की दरों के बारे में फैसला होगा।

जेटली ने कहा कि काउंसिल ने अफोर्डेबल हाउसिंग पर जीएसटी की दर 8 प्रतिशत (अबेटमेंट के साथ) से घटाकर एक प्रतिशत और सामान्य हाउसिंग पर जीएसटी 12 प्रतिशत (अबेटमेंट के साथ) से घटाकर पांच प्रतिशत करने का निर्णय किया गया है। हालांकि जीएसटी दरों में कटौती के साथ बिल्डरों को इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार रियल एस्टेट को बढ़ावा देना चाहती है, इसलिए यह निर्णय किया गया है। इससे मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग और कमजोर आय वर्ग को मकान खरीदने में सुविधा होगी।

जेटली ने कहा कि जीएसटी के संबंध में अफोर्डेबल की परिभाषा में दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, मुंबई और बेंगलूर जैसे महानगरों में 60 वर्गमीटर और नॉन-मेट्रो शहरों में 90 वर्गमीटर कारपेट एरिया तथा 45 लाख रुपये तक मूल्य वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट इसके दायरे में आएंगे।जेटली ने कहा कि काउंसिल ने फिटमेंट कमिटी और लॉ कमिटी को रियल एस्टेट के संबंध में ट्रांजीशन नियम बनाने को भी कहा है। समिति 10 मार्च तक इन नियमों का प्रारूप तैयार कर लेगी जिसके बाद काउंसिल अगली बैठक में इन्हें मंजूरी दे देगी। अगली बैठक वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।

ट्रांजीशन नियमों का लाभ उन ग्राहकों को भी मिल सकेगा जिन्होंने अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट बुक किया हुआ है लेकिन उस प्रोजेक्ट को अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है। उल्लेखनीय है कि रियल एस्टेट की आवासीय परियोजनाओं के संबंध में जीएसटी की दो दरें थीं। पहली अफोर्डेबल परियोजनाओं के लिए जिनके लिए जीएसटी की दर 12 प्रतिशत रखी गयी थी लेकिन इन परियोजनाओं में जमीन की कीमत को देखते हुए 30 प्रतिशत के अबेटमेंट के साथ प्रभावी जीएसटी दर आठ प्रतिशत थी।

वहीं सामान्य परियोजनाओं के लिए जीएसटी की दर 18 प्रतिशत थी लेकिन 30 प्रतिशत अबेटमेंट के साथ इसकी प्रभावी दर 12 प्रतिशत थी। इन दोनों श्रेणियों में बिल्डर को इनपुट टैक्स क्रेडिट का सुविधा का लाभ मिलता था। नई व्यवस्था में उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा। जेटली ने कहा कि रियल एस्टेट में पुन: नकदी का प्रचलन न बढ़ जाए, इसके लिए भी काउंसिल उपाय करेगी। इसके लिए यह जरूरी होगा कि बिल्डर्स को अधिकाधिक खरीददारी पंजीकृत डीलर से ही करनी होगी।

Posted By: Arun Kumar Singh