जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरूद्धार मंत्री नितिन गडकरी ने गंगा प्रेमियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि संसद के अगले सत्र में सरकार गंगा संरक्षण का कानून लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही गंगा की अविरलता पर पर्यावरण प्रवाह रिपोर्ट जारी करेगी और गंगा में एक निश्चित प्रवाह सुनिश्चित करेगी।

इसके साथ ही उन्होंने हरिद्वार में 89 दिनों से आंदोलनरत प्रो. जीडी अग्रवाल (सानंद) से अनशन खत्म करने की अपील की। वह दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित तीन दिवसीय गंगा सम्मेलन में अंतिम दिन देशभर से जुटे गंगा प्रेमियों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि गंगा की अविरलता व निर्मलता के लिए सरकार 25 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके अलावा सभी राज्यों में गंगा के पुनर्जीवन की योजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 70 फीसदी योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं।

इन योजनाओं में घाट, शवदाह गृह व गंगा में आने वाले नालों के शुद्धिकरण के लिए संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। चार हजार से अधिक गंगा ग्रामों में शौचालय का निर्माण कर लिया गया है। पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए आइआइटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रयास शुरू किए गए हैं। 15 दिन के अंदर गंगा के पर्यावरणीय प्रवाह की रिपोर्ट जारी होगी।

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में इस वर्ष होने वाले कुंभ में लाखों लोगों के आने की संभावना है, जिसको ध्यान में रखते हुए गंगा में पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार गंगा को लेकर विधेयक लाने को कटिबद्ध है। संबंधित नौ विभागों की रिपोर्ट आ गई है। वन व पर्यावरणीय विभाग की रिपोर्ट आनी बाकी है। रिपोर्ट आते ही कानून का प्रारूप केंद्रीय मंत्रीमंडल में रखा जाएगा और अगले सत्र में गंगा का कानून संसद में आएगा।

उन्होंने कहा कि अब गंगा के साथ-साथ उसकी सहायक नदियों की अविरलता का काम तेजी से शुरू करने के लिए डीपीआर बना लिए गए हैं। सरकार अब गंगा पर नए प्रोजेक्ट नहीं लगाएगी। गडकरी ने कहा कि गंगा की 70 फीसदी समस्याएं खत्म हुई हैं।

स्वयं मंत्री के तौर पर गंगा को निर्मल करने की ठान ली है, इसके लिए उन्हें सभी का सहयोग चाहिए। गंगा में जो 25 साल में काम नहीं हुए थे, वह चार साल में किए गए हैं। गंगा ग्राम जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को उन्होंने बढ़ावा दिया है। गंगा के किनारे पेड़ लगाने का काम शुरू हो रहा है।

इस मौके पर जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि तीन दिन तक चले इस गंगा सम्मेलन में गंगा के लिए बनाए जा रहे कानून के विविध पक्षों पर चर्चा हुई है और इसके आधार पर यह तथ्य सामने आया है कि गंगा के लिए जो भी कानून बने उसमें प्रो. जीडी अग्रवाल के सुझावों को विशेष महत्व दिया जाए।

Edited By: Arun Kumar Singh