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    USAID पर वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट पर बवाल, कांग्रेस बोली- सरकार का झूठ हुआ उजागर; भाजपा ने भी किया पलटवार

    By Agency Edited By: Mahen Khanna
    Updated: Mon, 24 Feb 2025 11:43 PM (IST)

    Finance Ministry report on USAID वित्त मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट से पता चला है कि अमेरिकी एजेंसी ने वित्त वर्ष 2023-24 में 75 करोड़ डालर की सात परियोजनाओं की फंडिंग की है। इसके बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पोस्ट किया कि किसी और ने नहीं बल्कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री और उनके विदेश मंत्री सहित उनकी झूठ ब्रिगेड के झूठ को पूरी तरह से उजागर किया है।

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    Finance Ministry report on USAID कांग्रेस भाजपा में हुआ वार-पलटवार।

    पीटीआई, नई दिल्ली। Finance Ministry report on USAID अमेरिकी एजेंसी यूएसएड की फंडिंग से जुड़े विवाद के बीच कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया कि वित्त मंत्रालय की वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट से सरकार का झूठ पूरी तरह से उजागर हो गया है।

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    दूसरी तरफ, भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल पर भारत के लोकतंत्र को अस्थिर करने की कोशिश करने वाले विदेशी दानदाताओं के दखल का बचाव करने का आरोप लगाया।

    USAID ने सात परियोजनाओं की फंडिंग की

    दरअसल, वित्त मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट से पता चला है कि अमेरिकी एजेंसी ने वित्त वर्ष 2023-24 में 75 करोड़ डालर की सात परियोजनाओं की फंडिंग की है। इसके बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, किसी और ने नहीं, बल्कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री और उनके विदेश मंत्री सहित उनकी झूठ ब्रिगेड के झूठ को पूरी तरह से उजागर किया है।

    वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कई खुलासे

    वित्त मंत्रालय की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएसएड वर्तमान में भारत सरकार के सहयोग से लगभग 75 करोड़ डालर के संयुक्त बजट की सात परियोजनाओं को कार्यान्वित कर रही है। इनमें से एक भी परियोजना का मतदान प्रतिशत से कोई लेना-देना नहीं है।

    कांग्रेस का वार, भाजपा का पलटवार

    ये सभी परियोजनाएं केंद्र सरकार के साथ और उसके माध्यम से हैं। कांग्रेस पर पलटवार करते हुए भाजपा के आइटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि कांग्रेस और उसके तंत्र की हताशा विवादास्पद यूएसएड फंडिंग से ध्यान हटाने की है।

    जार्ज सोरोस (अमेरिकी कारोबारी) से जुड़े मोर्चों और एनजीओ ढांचे के माध्यम से भारत की चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए यह पैसा भेजा जाता है। अब यह स्पष्ट है कि लाभार्थी कौन है? मालवीय ने कहा कि जिन परियोजनाओं का जिक्र किया जा रहा है, वह सरकार-से-सरकार के बीच की भागीदारी वाली हैं। इन्हें पारदर्शी रूप से बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के रूप में निष्पादित किया जाता है।

    ट्रंप ने लगाई थी फंडिंग पर रोक

    बताते चलें, हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि जो बाइडन के नेतृत्व वाले पिछले अमेरिकी प्रशासन के तहत यूएसएड ने भारत में वोटर टर्नआउट (मतदान में मतदाताओं की भागीदारी) बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डालर दिए थे। इसको लेकर कांग्रेस और भाजपा द्वारा एक-दूसरे पर निशाना साधा जा रहा है।