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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 13, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Watch Exclusive Interview: पहले जम्मू-कश्मीर में शांति खरीदी जाती थी, हमने स्थापित की: मनोज सिन्हा

By Arun Kumar SinghEdited By:
Published: Tue, 13 Sep 2022 07:32 PM (IST)Updated: Wed, 14 Sep 2022 12:34 AM (IST)

जब अनुच्छेद 370 हटाया गया था तो कुछ परेशान लोग यह अफवाह फैला रहे थे कि प्रदेश में तिरंगा उठाने ...और पढ़ें

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा से बातचीत करते जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा!
दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा से बातचीत करते जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा!

कभी आतंक के साये में जीने वाले जम्मू-कश्मीर में यूं तो अभी भी छिटपुट हिंसा जारी है लेकिन प्रशासन कृतसंकल्प है कि केवल गोली चलाने वाले ही नहीं, गोली चलवाने वाला हर शख्स भी शिकंजे में होगा। जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा का मानना है कि सुरक्षा स्थिति में आए बदलाव का कारण केंद्र और राज्य प्रशासन का बदला हुआ नजरिया है। पहले शांति खरीदने की कोशिश होती थी जबकि अब शांति स्थापित करने का प्रयास हुआ है। सुरक्षित माहौल में जनता के लिए विकास का हर रास्ता प्रशस्त हुआ है।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा और जागरण डिजिटल के संपादक कमलेश रघुवंशी से बातचीत में मनोज सिन्हा कहते हैं- कुछ लोग राजनीतिक कारणों से विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता का समर्थन प्रशासन के साथ है। हमने पहले भी चुनाव करवाए हैं और आगे के चुनाव के लिए भी तैयार हैं। पेश है बातचीत का एक अंश

सवाल- फिलहाल जम्मू-कश्मीर से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव कब होंगे। क्या राज्य प्रशासन से चुनाव की हरी झंडी है?

चुनाव नहीं होने की तो कोई आशंका ही नहीं है। खुद गृहमंत्री अमित शाह ने संसद के अंदर आश्वासन दिया था कि पहले डिलिमिटेशन, फिर चुनाव और उपयुक्त समय पर स्टेटहुड। सब कुछ जस का तस है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन पूरी तरह तैयार है। हम तो पहले ही जिला परिषद का चुनाव करवा चुके हैं और इतनी सफलता के साथ कि एक बूंद खून नहीं गिरा। विधानसभा चुनाव भी अच्छी तरह होगा। कब होगा यह चुनाव आयोग तय करेगा। लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि लोग व्यवस्था पर जो सवाल खड़े कर रहे हैं वो ठीक नहीं है। डिलिमेटेशन कमीशन में तो राज्य के पांच- पांच सदस्य थे। आयोग ने कहा है कि नवंबर के अंत तक मतदाता सूची का नवीनीकरण किया जाए। वह हो रहा है।

सवाल- नए मतदाताओं को लेकर भी आपत्ति की जा रही है। कहा जा रहा है कि बाहरी वोटर लाए जा रहे हैं?

राजनीतिक कारणों से कौन क्या कह रहा है मैं उस पर कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन क्या यह सच नहीं है कि आप जहां रहते हैं वहां वोट कर सकते हैं। हर किसी को अधिकार है। यह संवैधानिक व्यवस्था है। जम्मू -कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा और वह सारी सुविधाएं मिलनी शुरू हुईं जो देश के दूसरे हिस्से में थीं। यह भी उसी का हिस्सा है। फिर विवाद क्यूं।

सवाल- प्रदेश में सुरक्षा स्थिति सामान्य हुई है यह तो दिख रहा है। लेकिन कुछ आतंकी घटनाएं जारी हैं। क्या उस पर लगाम लगाना संभव है?

देखिए, केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर प्रशासन का एक ध्येय तो बिल्कुल स्पष्ट है कि बेगुनाह को छेड़ो नहीं और गुनहगार को छोड़ो नहीं। इसे महसूस करना हो तो जम्मू कश्मीर जाकर देख आइए। वहां की अवाम खुश है। लोग सुरक्षित होकर अपना काम कर रहे हैं लेकिन जो लोग आतंक का इकोसिस्टम चलाते हैं वे परेशान हैं। छिटपुट घटनाएं हो जाती हैं लेकिन हम उस पर भी अंकुश लगाने को कृतसंकल्प हैं।

जब अनुच्छेद 370 हटाया गया था तो कुछ परेशान लोग यह अफवाह फैला रहे थे कि प्रदेश में तिरंगा उठाने वाला कोई हाथ नहीं होगा। लेकिन हाल में जब राष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा कार्यक्रम हुआ जम्मू-कश्मीर ने उदाहरण पेश किया। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने जो रेटिंग की, उसमें जम्मू-कश्मीर अव्वल था। यह बदलाव इसलिए संभव हुआ है क्योंकि अब केंद्र और राज्य प्रशासन का नजरिया अलग है। पहले शांति खरीदने की कोशिश होती थी। उपद्रवी तत्वों को साधने की कोशिश होती थी। अब शांति स्थापित की जा रही है और लोगों का समर्थन मिल रहा है।

सवाल- प्रदेश में कई सरकारी कर्मचारियों की भी आतंकियों से मिलीभगत सामने आई थी। क्या उस स्तर पर पूरी सफाई हो चुकी है?

पहले मैं थोड़ी स्थिति स्पष्ट कर देना चाहता हूं। जब संविधान सभा की बैठक हुई थी तो वहां यह सवाल आया था कि जो राष्ट्रहित के खिलाफ काम कर रहे हों उन्हें बिना कारण बताए हटा देना चाहिए। हमने उसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कई कर्मचारियों को निकाला था। उनके तार कहां कहां जुड़े थे यह सार्वजनिक है। यह प्रक्रिया जारी है और तब तक रहेगी, जबकि पूरी सफाई नहीं हो जाती है।

सवाल- कश्मीरियों के पुनर्वास की योजना तो बन गई लेकिन क्या यह अपेक्षित गति से चल रहा है?

अगर आपका पुनर्वास होना है तो आपके अंदर भी इच्छा होनी चाहिए इसमे तो कोई शक नहीं। मैं अपील करूंगा कि यह भाव पैदा करें। प्रशासन पैकेज को लेकर भी गंभीर है और सुरक्षा को लेकर भी। पैकेज के तहत छह हजार नौकरी और छह हजार घर बनाकर देना है। जब मैं गया था तब तक तीन हजार को नौकरी दी गई थी लेकिन घर बनाने का मामला ठप था।

घर कहां बनना है, यही तय नहीं था। इस काम में तेजी आई है। घर बन रहे हैं और सुरक्षित हैं। बात यही खत्म नहीं होती है। यह प्राविधान था कि इस पैकेज के तहत नौकरी मिलने पर प्रमोशन सामान्य तरीके से नहीं हो सकता हमने उस दिशा में भी तेजी लाई है।

सवाल- करीब तीस साल पहले रुबिया सईद अपहरण मामले पर अब सुनवाई शुरू हुई है। क्या आप कुछ कहेंगे?

जो मामला कोर्ट में है उस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा। कुछ बातें इतिहास में दर्ज हैं। एक वक्त हत्याकांड हुआ था और एफआइआर तक नहीं हुई थी। लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में सुखद बदलाव की हवा है।

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