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    Lok Sabha: INDIA सहयोगी DMK और TMC का राम मंदिर पर चर्चा से किनारा, कांग्रेस सदस्यों की भी संख्या रही बहुत कम

    Updated: Sat, 10 Feb 2024 09:47 PM (IST)

    Lok Sabha लोकसभा चुनाव मैदान में जाने से 17वीं लोकसभा सत्र के अंतिम दिन ने राजनीतिक दलों के सियासी रुख का भी इशारा किया। राम मंदिर निर्माण पर चर्चा के दौरान आइएनडीआइए के सहयोगी वह दो दल बिल्कुल किनारा कर गए जो सेक्युलर राजनीति का दावा करते हुए सनातन धर्म या राम मंदिर निर्माण को लेकर अलग रुख दिखाते रहे हैं।

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    आज संसद के बजट सत्र का समापन हो गया। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव मैदान में जाने से 17वीं लोकसभा सत्र के अंतिम दिन ने राजनीतिक दलों के सियासी रुख का भी इशारा किया। राम मंदिर निर्माण पर चर्चा के दौरान आइएनडीआइए के सहयोगी वह दो दल बिल्कुल किनारा कर गए, जो सेक्युलर राजनीति का दावा करते हुए सनातन धर्म या राम मंदिर निर्माण को लेकर अलग रुख दिखाते रहे हैं।

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    डीएमके ने किया सदन का बहिष्कार

    डीएमके ने तमिलनाडु के मछुआरों का मुद्दा उठाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया तो तृणमूल कांग्रेस के सदस्य चर्चा में शामिल होने के लिए पहुंचे ही नहीं। कांग्रेस से सोनिया गांधी व अधीर रंजन चौधरी के अलावा छिटपुट सदस्य मौजूद थे।

    लोकसभा में शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर चर्चा के प्रस्ताव को लेकर सभी की नजरें इस पर थीं कि भाजपा सदस्यों में अति उत्साह भरने वाली इस चर्चा को लेकर विपक्षी दलों का क्या रुख रहेगा। ऐसे में देखा गया कि लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ आइएनडीआइए में शामिल डीएमके के सदस्य सदन में पहुंचे जरूर, लेकिन चर्चा में शामिल नहीं हुए। उन्होंने तमिलनाडु के मछुआरों के मुद्दे पर चर्चा की अनुमति न मिलने पर असंतोष जाहिर करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया।

    टीएमसी सांसद नहीं पहुंचे सदन

    वहीं, टीएमसी के सदस्य सदन में पहुंचे ही नहीं। इसे पुराने घटनाक्रमों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बेटे उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म के विरुद्ध कई बार अमर्यादित टिप्पणी कर चुके हैं।

    इसी तरह जय श्रीराम के उद्घोष पर बंगाल की मुख्यमंत्री सहित टीएमसी के अन्य नेता भी सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताते रहे हैं। राम मंदिर निर्माण से चर्चा से खुद को अलग कर दोनों दलों ने अपने समर्थक वर्ग को भी संदेश देने का प्रयास किया है। वहीं, कांग्रेस के सदस्यों की संख्या सदन में बेहद कम रही।

    माना जा रहा है कि रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से किनारा करने वाली कांग्रेस सेक्युलर छवि और साफ्ट हिंदुत्व के बीच संतुलन बनाने की उहापोह में चर्चा में शामिल तो हुई, लेकिन साथ-साथ कई सदस्यों में असहजता भी देखी गई।