जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजनीति में हाशिये पर पहुंच चुकी मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को अयोध्या विवाद में शीर्ष अदालत के फैसले में न्याय नहीं दिख रहा है। पार्टी की पोलित ब्यूरो की दो दिवसीय बैठक में जो प्रस्ताव पारित किया गया, उसमें सुप्रीम कोर्ट के 'फैसले' पर ही सवाल खड़ा कर दिया गया है। पोलित ब्यूरो का कहना है 'अयोध्या विवाद पर कोर्ट का फैसला आया है, न्याय नहीं।'

प्रमुख वामपंथी माकपा की पोलित ब्यूरो ने यह भी कहा है कि उनकी पार्टी अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए हमेशा आपस में समझौते की पक्षधर रही है। लेकिन समझौता न हो सके तो अदालत के फैसले से मामले को सुलझाया जाए। पार्टी पोलित ब्यूरो के ताजा रुख से और भ्रम फैलता है। अदालत की अस्मिता और कानूनी समाधान पर लगाया जा रहा प्रश्नचिन्ह माकपा को खुद कठघरे में खड़ा करता है। शीर्ष अदालत के फैसले में पार्टी को 'न्याय' नहीं दिख रहा है। पार्टी न्याय किसे मानेगी, इसका खुलासा नहीं किया है।

दरअसल, देश में चल रही राजनीतिक हवा को भांपने में विफल रहे वामपंथी दलों को हमेशा मुंह की खानी पड़ी है। केंद्र से लेकर राज्यों तक में उनके राजनीतिक तंबू कनात एक-एक कर उखड़ते चले गये और अब वो केरल तक में सिमट कर रह गये हैं। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चौतरफा सराहा गया, लेकिन वामपंथी दलों ने इसे आधे अधूरे मन से स्वीकार किया है।

पोलित ब्यूरो की दो दिवसीय बैठक में अयोध्या के अलावा अन्य कई मुद्दों पर भी प्रस्ताव पारित किये गये हैं, जिनमें देश में चल रही आर्थिक मंदी प्रमुख है। घटती आर्थिक विकास दर पर चिंता जताते हुए सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े किये गये हैं।

 

Posted By: Tilak Raj

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