जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील और पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर पर सीबीआइ का शिकंजा कस गया है। जांच एजेंसी ने करोड़ों रुपये के विदेशी चंदे के दुरुपयोग के आरोप में घिरे आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ 'लॉयर्स कलेक्टिव' के खिलाफ एफआइआर दर्ज करते हुए दिल्ली और मुंबई में पांच जगहों पर छापेमारी की है।

लॉयर्स कलेक्टिव लंबे समय से एफसीआरए नियमों के उल्लंघन के आरोपों में घिरा है। 2016 में गृह मंत्रालय की टीम की ओर एनजीओ के बही-खाते की जांच के बाद अनियमितताओं का खुलासा हुआ।

सीबीआइ को भेजी गई गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2006 से 2014 के बीच लॉयर्स कलेक्टिव के खाते में लगभग 33 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा आया था। इनमें से 13 करोड़ रुपये के खर्च में अनियमिता के सबूत मिले हैं।

मई 2016 में एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस अस्थायी रूप से निरस्त करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया, लेकिन जवाब से संतुष्ट नहीं होने के बाद दिसंबर 2016 में एफसीआरए लाइसेंस पूरी तरह निरस्त कर दिया गया, लेकिन बांबे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किये जाने के बाद आगे की कार्रवाई रुक गई।

दो महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने लॉयर्स कलेक्टिव के खिलाफ एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एजेंसियों को जांच जारी रखने के लिए हरी झंडी दे दी।

सीबीआइ एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मई के अंत में गृह मंत्रालय की ओर से जांच की अनुशंसा का पत्र मिलने के बाद 13 जून को एफआइआर दर्ज की गई। इसी सिलसिले में गुरूवार को आनंद ग्रोवर के दिल्ली स्थित घर और दफ्तर के साथ-साथ लॉयर्स कलेक्टिव के मुंबई स्थित आफिस पर भी छापा मारा गया।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि लायर्स कलेक्टिव को मिले चंदे में कुल कितने करोड़ रूपये की गड़बड़ी हुई और इससे किसी व्यक्ति या संस्था को जानबूझकर लाभ पहुंचाने की कोशिश तो नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय को भी मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत जांच के लिए कहा जा सकता है, ताकि दुरुपयोग की राशि को आरोपियों के पास से जब्त किया जा सके।

Posted By: Bhupendra Singh

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