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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 21, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भाजपा ने कहा- जनसंघ की स्थापना राजनीति में शुचिता स्थापित करने के लिए की गई थी

By Bhupendra SinghEdited By:
Published: Mon, 21 Oct 2019 07:18 PM (IST)

जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। संस्थापक सदस्यों में प्रमुख ...और पढ़ें

भाजपा ने कहा- जनसंघ की स्थापना राजनीति में शुचिता स्थापित करने के लिए की गई थी
भाजपा ने कहा- जनसंघ की स्थापना राजनीति में शुचिता स्थापित करने के लिए की गई थी

राज्य ब्यूरो, जयपुर। भाजपा ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में जनसंघ का स्थापना दिवस मनाया। जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में प्रमुख रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय थे।

जनसंघ का स्थापना दिवस

इस मौके पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि राजनीति में शुचिता स्थापित करने के लिए भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई थी। जिन लोगों ने भारतीय जनसंघ को खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, उनमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रमुख रहे। आज इनके सिद्धांतों पर चलकर भाजपा का वटवृक्ष फल-फूल रहा है। जो सिद्धांत उन नेताओं ने दिए, वे ही आज भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान कर रहे हैं।

भाजपा जनसंघ के सिद्धांतों को लेकर आगे बढ़ रही है

कटारिया ने कहा कि भारतीय जनसंघ का केंद्र बिंदु राष्ट्र था, व्यक्ति नहीं। इसलिए भाजपा भी उन्हीं सिद्धांतों को लेकर आगे बढ़ रही है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय को किया याद

भाजपा के प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय को याद करते हुए कहा कि हमारे जनसंघ के संस्थापकों ने पद-प्रतिष्ठा का लोभ न रखते हुए जनसेवा, विचार और सिद्धांतों की राजनीति को ही महत्वपूर्ण रखा।

भाजपा चुनाव सुधार ही नहीं, बल्कि समाज सुधार के लिए तत्पर है

आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों पर भाजपा का कार्यकर्ता सिर्फ चुनाव सुधारों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज सुधार के लिए भी कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए।