गोवा में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने को तैयार, सीएम प्रमोद सावंत जीते, पर उनके दोनों डिप्टी सीएम को मिली हार
2012 में मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में भाजपा को 21 सीटें मिली थीं। पर्रिकर की ही तैयार की गई बुनियाद पर गोवा भाजपा एक बार फिर उसी संख्या के करीब अपने दम पर पहुंचने में सफल रही है। लेकिन इस बार उसके मत प्रतिशत में कुछ बढ़ोतरी भी हुई है।

मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी। Goa Election Results 2022- कभी अस्थिरता का पर्याय रहे छोटे से राज्य गोवा में भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार स्थाई सरकार देने को तैयार है। 40 सदस्यों वाली विधानसभा में उसे 20 सीटें हासिल हुई हैं और उसने एमजीपी के दोनों और तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा किया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत जीत गए हैं, लेकिन उनके दोनों डिप्टी सीएम हार गए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस अपने एक सहयोगी दल के साथ 12 सीटों पर सिमट कर रह गई है।
पर्रिकर की तैयार की गई बुनियाद पर गोवा भाजपा
साल 2012 में मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में भाजपा को 21 सीटें मिली थीं। पर्रिकर की ही तैयार की गई बुनियाद पर गोवा भाजपा एक बार फिर उसी संख्या के करीब अपने दम पर पहुंचने में सफल रही है। लेकिन इस बार उसके मत प्रतिशत में कुछ बढ़ोतरी भी हुई है। अब तक भाजपा जहां अधिकतम 33 फीसद मतों के साथ सत्ता में आती रही है, इस बार उसका मत प्रतिशत 34 फीसद से ऊपर जाता दिखाई दे रहा है। हालांकि, मनोहर पर्रीकर के बेटे उत्पल पर्रीकर पणजी सीट से मात्र 674 मतों से हार गए हैं। उन्हें कांग्रेस से भाजपा में आए अतानसियो मोनसेराटे ने हराया है।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत सीट बचाने में रहे कामयाब
मोनसेराटे ने कहा है कि यह उनकी अपनी जीत है, भाजपा की नहीं, क्योंकि पार्टी कैडर ने उत्पल को जीताने की कोशिश की थी। पणजी से ही चुनाव लड़ने की जिद के कारण भाजपा ने उत्पल को टिकट नहीं दिया था। वह निर्दलीय लड़े थे।मुश्किल से जीते मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत कड़ी चुनौती का सामना करते हुए मात्र 666 मतों से अपनी सीट बचाने में सफल रहे हैं, लेकिन उनके दोनों उप मुख्यमंत्री मनोहर अजगांवकर और चंद्रकांत कवलेकर चुनाव हार गए हैं। दोनों को कांग्रेस प्रत्याशियों से हार मिली है। जगांवकर को दिगंबर कामत और कवलेकर को अल्टन डीकोस्टा ने पराजित किया है।
आप और तृणमूल से कांग्रेस को लगा झटका
इस बार आम आदमी पार्टी यानी आप भी गोवा में अपना प्रभाव दिखाने में सफल रही है। उसे जीत तो दो ही सीटों पर हासिल हुई है, लेकिन उसके और तृणमूल कांग्रेस के कारण कांग्रेस को गहरी चोट पहुंची है। इन्हीं दलों के कारण राज्य की करीब सात सीटों पर कांग्रेस 100 से भी कम मतों के अंतर से जीत हासिल करने से चूक गई।ईसाई बहुल सीटों पर आप को मिली जीत आप ईसाई बहुल सीटों पर अपना प्रभाव दिखाने में कामयाब रही है। उसके दोनों विजयी प्रत्याशी भी ईसाई ही हैं। इसके अलावा एक स्थानीय पार्टी रिवोल्यूशनरी गोवा (आरजी) भी जीती तो एक ही सीट पर है, लेकिन उसने कई सीटों पर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है। एमजीपी के अध्यक्ष भी हारे तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन करके लड़ रही गोवा की सबसे पुरानी पार्टी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) की भी हालत खराब ही दिखी। उसके अध्यक्ष दीपक धवलीकर भी अपनी सीट नहीं बचा सके।
इस बार विधानसभा में होंगे तीन दंपती
गोवा विधानसभा में इस बार तीन दंपती भी होंगे। भाजपा सरकार में मंत्री रहे विश्वजीत राणे और उनकी पत्नी दिविया को क्रमश: वलपोई और पोरियम सीट से जीत मिली है। विश्वजीत को आठ हजार से तो उनकी पत्नी को 13 हजार से अधिक मतों से जीत मिली है। पणजी सीट से भाजपा के अतानसियो मोनसेराटे को जीत मिली है तो तलीगांव से उनकी पत्नी जेनिफर भी भाजपा टिकट पर जीती हैं। इसी तरह कांग्रेस के माइकल लोबो अपनी परंपरागत सीट कलंगुट से जीते हैं। वहीं, उनकी पत्नी दलीला कांग्रेस के टिकट पर सियोलिम से जीती हैं।
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