तेलंगाना में विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में भाजपा हाई कोर्ट पहुंची, TRS के आरोपों को नकारा
केंद्रीय मंत्री ने इस मामले की सीबीआइ अथवा सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराने की मांग की। इसी तरह की मांग करते हुए तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष बांदी संजय ने पुलिस छापेमारी को मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के दिमाग की उपज बताया।

हैदराबाद, एएनआइ। तेलंगाना में भाजपा और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस)के बीच चल रहा राजनीतिक विवाद अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। प्रदेश भाजपा ने टीआरएस विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले की सीबीआइ अथवा विशेष जांच दल (एसआइटी) से जांच कराने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। बता दें कि टीआरएस ने भाजपा पर अपने विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने किया मामला दर्ज
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रदेश भाजपा महासचिव गुज्जुला प्रेमेंदर रेड्डी की ओर से दायर याचिका में टीआरएस सरकार की ओर की जा रही जांच को पक्षपातपूर्ण और अनुचित करार दिया गया है। भाजपा ने कहा कि टीआरएस के आरोप बेबुनियाद हैं और उसने उसके किसी विधायक को खरीदने का कोई प्रयास नहीं किया। उधर केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने टीआरएस के आरोपों को नाटक करार दिया और पुलिस से तीन लोगों से जब्त राशि को सार्वजनिक करने की मांग की।
सीबीआइ अथवा एसआइटी से जांच कराने मांग
केंद्रीय मंत्री ने इस मामले की सीबीआइ अथवा सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराने की मांग की। इसी तरह की मांग करते हुए तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष बांदी संजय ने पुलिस छापेमारी को मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के दिमाग की उपज बताया। उधर प्रेट्र के अनुसार साइबराबाद पुलिस ने टीआरएस के चार विधायकों को दल बदलने के लिए मनाने की कथित तौर पर कोशिश करने वाले तीन लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के रहने वाले रामचंद्र भारती और नंद कुमार भाजपा से ताल्लुक रखते हैं। एफआइआर के मुताबिक, विधायक पायलट रोहित रेड्डी की शिकायत पर तीन आरोपितों रामचंद्र भारती, नंद कुमार और सिम्हायाजी स्वामी के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, घूस देने और भ्रष्टाचार की रोकथाम कानून, 1988 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, टीआरएस के चार विधायकों, जी बलाराजू, बी हर्षवर्धन रेड्डी, आरके राव और रोहित रेड्डी को कथित तौर पर दलबदल करने के मकसद से नकदी, पद और अन्य प्रोत्साहन की पेशकश की जा रही थी।
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