Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Video: जब अटल ने लिखा- किंतु चीर कर तम की छाती, चमका हिन्दुस्तान हमारा

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Fri, 17 Aug 2018 11:52 AM (IST)

    भारत के इतिहास को बताना हो या उसके उज्‍जवल भविष्‍य का एहसास कराना हो, अटल ने इसके लिए भी अपनी कलम को ही चुना।

    Video: जब अटल ने लिखा- किंतु चीर कर तम की छाती, चमका हिन्दुस्तान हमारा

    नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। अटल बिहारी वाजपेयी की पहचान एक कवि के रूप में बेहद अनूठी थी। वह देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री रहे हैं जो कविता लिखते थे और मंचों पर उसका पाठ भी करते थे। राजनीति से अलग उनकी ये पहचान बेहद अलग थी। उनका कविता संग्रह पब्लिश भी हो चुका है। उनकी कविताओं को मशहूर दिवंगत गायक जगजीत सिंह ने भी आवाज दी है। बात लोगों की पेरशानियों को उजागर करने की हो या राजनीति पर तंज कसने की सभी में वाजपेयी की कलम धार-दार होती थी। भारत के इतिहास को बताना हो या उसके उज्‍जवल भविष्‍य का एहसास कराना हो, अटल ने इसके लिए भी अपनी कलम को ही चुना।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    आप भी पढिये और सुनिये उनकी ये कविता

    दुनिया का इतिहास पूछता

    दुनिया का इतिहास पूछता,

    रोम कहां, यूनान कहां?

    घर-घर में शुभ अग्नि जलाता।

    वह उन्नत ईरान कहां है?

    दीप बुझे पश्चिमी गगन के,

    व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा,

    किन्तु चीर कर तम की छाती,

    चमका हिन्दुस्तान हमारा।

    शत-शत आघातों को सहकर,

    जीवित हिन्दुस्तान हमारा।

    जग के मस्तक पर रोली सा,

    शोभित हिन्दुस्तान हमारा।