गोवा में संभलकर चलने का संदेश, डबल इंजन की सरकार का लाभ मणिपुर की जनता ने देखा
Assembly Election Analysis 2022 के चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर 21 से बढ़कर 32 पर पहुंच पूर्ण बहुमत का सफर तय कर लिया है। मुख्यमंत्री एन.वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार का लाभ मणिपुर की जनता ने देखा है।

मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी। Assembly Election Analysis निश्चितरूप से गोवा में भारतीय जनता पार्टी के लिए अपेक्षित परिणाम ही आए हैं। उसे पिछले चुनाव से सात सीटें अधिक मिलना और मत प्रतिशत में भी बढ़ोतरी उसके लिए संतोष का विषय भले हो सकता है लेकिन इन उपलब्धियों के साथ उसे इस तथ्य को भी ध्यान में रखना होगा कि अन्य पार्टियों से भाजपा में आए 10 में से नौ प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा है। उसके करीब-करीब आधे उम्मीदवारों की जीत का अंतर इतना कम रहा है कि वे हार भी सकते थे।
गोवा में आम आदमी पार्टी एवं रिवोल्यूशनरी गोवन्स पार्टी (आरजीपी) का उभार भी भाजपा के लिए चिंताजनक है। कुछ ही महीने पहले उभरी आरजीपी जैसी क्षेत्रीय पार्टी को पहले ही चुनाव में 9.33 फीसद वोट मिल जाना मामूली बात नहीं है। उसके द्वारा क्षेत्रीयता का उभार भविष्य में उसे गोवा की शिवसेना का दर्जा दिलवा सकता है। इसी प्रकार आम आदमी पार्टी भी जीती भले ही दो सीटों पर हो, लेकिन उसे 6.8 फीसद मत मिले हैं। ये दोनों दल विशेषकर नौजवानों को साथ लेकर चल रहे हैं। यदि भाजपा नौजवानों की अपेक्षाओं पर खरी न उतरी तो भविष्य में ये दोनों दल उसके लिए बड़ा सिरदर्द बन सकते हैं।
संपूर्ण पूर्वोत्तर का प्रतिबिंब : मणिपुर में जब 2017 का चुनाव हो रहा था, उन्हीं दिनों वहां कई सप्ताह से अलगाववादी समूहों द्वारा अक्सर आयोजित की जानेवाली आर्थिक बंदी का दौर चल रहा था। मणिपुर की राजधानी इंफाल की ओर जानेवाले रास्तों पर आम लोगों की जरूरत के सामान लदे ट्रकों की मीलों लंबी कतारें देखी जा सकती थीं। राज्य में डीजल-पेट्रोल का मिलना मुश्किल था। सुरक्षा बलों पर अलगाववादियों के हमले होना आम बात थी। शायद इसी मुसीबत का परिणाम था कि 2017 में मणिपुर की जनता ने भाजपा को पहली बार मौका दिया। तब वहां भाजपा कांग्रेस के ही कुछ विधायकों को तोड़कर चुनाव लड़ी और 60 सदस्यों वाली विधानसभा में अपने 21 विधायक चुनवाकर लाई। सहयोगी दलों एनपीपी और एनपीएफ के साथ मिलीजुली सरकार बनाने में सफल रही थी।
[ब्यूरो प्रमुख, मुंबई]
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