नई दिल्‍ली [जेएनएन]। फ्रांस के साथ 36 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 2016 में समझौता हुआ था। भारतीय वायु सेना को उम्मीद है कि सितंबर 2019 से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इन 36 विमानों को दो स्क्वाड्रन में बांटा जाएगा। इनमें से एक पाकिस्तान से मुकाबले के लिए अंबाला में जबकि दूसरा चीन से मुकाबले के लिए पश्चिम बंगाल के हाशिमपुरा में तैनात किया जाएगा। राफेल लड़ाकू विमानों से भारतीय वायु सेना को अभूतपूर्व मारक क्षमता प्राप्त होगी।

एक स्क्वाड्रन में 16 से 18 लड़ाकू विमान होते हैं। भारतीय वायु सेना के पास इस समय मात्र 31 स्क्वाड्रन लड़ाकू विमान हैं। राफेल लड़ाकू विमान की अधिकतम रफ्तार 2,390 किलोमीटर प्रति घंटा है। डेढ़ दशक से अधिक की प्रतीक्षा के बाद आखिरकार भारतीय वायु सेना के लिए बहु-उद्देश्यीय भूमिका वाले राफेल लड़ाकू विमानों के हासिल होने से वायु सेना की ताकत निश्चित रूप से बढ़ जाएगी। साथ ही राडार की पकड़ में न आने वाले ये विमान वायु सेना के उम्रदराज विमानों की जगह लेंगे।

दसाल्ट कंपनी के राफेल विमान ने चार जुलाई 1986 को अपनी पहली उड़ान भरी थी। यह 2006 से फ्रांस की वायु सेना तथा नौ सेना में सेवा दे रहा है। अन्य लड़ाकू विमानों की तुलना में लंबाई-चौड़ाई कम होने के साथ ही यह काफी हल्का है। इस विमान की लंबाई 15.27 मीटर, ऊंचाई 5.34 मीटर व इसके विंगस्पैन 35.4 फीट हैं। दो सीट वाले इस विमान का बगैर हथियारों के वजन 10,300 किलोग्राम है जबकि हथियारों सहित 14,016 किलोग्राम व रेंज 1,000 नॉटिकल मील है।

यह लगभग 26,000 किलोग्राम वजन ले जाने में सक्षम है। यह 3,700 किलोमीटर के रेडियस में कहीं भी हमला करने में सक्षम है। यह 36 से 60 हजार फीट की उंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है और एक मिनट में ही 60,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंच जाता है। यह 1,312 फुट के बेहद छोटे रनवे से भी उड़ान भर सकता है। इस लिहाज से यह समुद्र में तैनात युद्धपोतों से भी उड़ान भर सकता है। इस विमान का काकपिट ऐसे डिजाइन किया गया है कि पायलट कम से कम प्रयास के साथ इसे बेहतर ढंग से उड़ा सके।

फ्रेंच भाषा में राफेल का अर्थ तूफान होता है। यह विमान वाकई तूफान लाने वाला है। एक बार फ्यूल भरने के बाद यह 10 घंटे की लगातार उड़ान भर सकता है। यह पाकिस्तान के कराची शहर पर हमला करके एक घंटे में लौट सकता है। चीन के बीजिंग शहर पर हमला करके वापस आने में इसे मात्र तीन घंटे का समय लगेगा।

यह हवा से जमीन और हवा से हवा में हमला करने वाली मिसाइलों से सुसज्जित है। ये मिसाइलें परमाणु हमला करने में सक्षम हैं और बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान के साथ मिसाइलों को दागा जा सकता है। इस पर लगी गन एक मिनट में 125 फायर कर सकती है। यह हर मौसम में लंबी दूरी के खतरे को भांप लेता है। इसमें ऑक्सीजन जेनरेशन सिस्टम है इसलिए इसमें लिक्विड ऑक्सीजन भरने की जरूरत नहीं है। अगर एवियॉनिक्स जैसी विषेशताएं देखी जाएं तो इसमें आरबीआइ 2 राडार लगा है जिसकी रेंज 150 किलोमीटर तक की है।

इन विमानों के शामिल होने से भारतीय वायु सेना की मजबूती व मारक क्षमता में व्यापक वृद्धि होगी क्योंकि भारतीय वायु सेना के पास जो 836 विमान हैं उनमें से 450 ही युद्ध में भूमिका निभाने लायक हैं। इनमें 272 सुखोई, 68 मिग-29, 51 मिराज- 2000 और कुछ जगुआर हैं।

फ्रांस से मिलने वाले इन मल्टी व मीडियम रोल कांबेक्ट एयरक्राफ्ट्स को भारत की पश्चिमी सीमा पर स्थित जोधपुर वायु सैनिक स्टेशन पर भी तैनात किए जाने की योजना है क्योंकि पश्चिमी सीमा पर सबसे पुराने एयरबेस का सामरिक दृष्टि से खास महत्व है। अन्य हवाई अड्डों की तुलना में इसकी भूमिका अत्यंत निर्णायक रहती है। इसीलिए पश्चिमी सीमा को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए इनकी जरूरत होगी। इस तरह पाकिस्तान और चीन के साझा प्रयासों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया जा सकेगा। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal