आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई को लेकर कठघरे में पाकिस्तान, भारत-अमेरिका ने बनाया दबाव
भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में सीधे पाकिस्तान का नाम लिया गया। वार्ता में आतंकवाद पर पहले से चल रहे साझा सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर सहमति बनी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : पाकिस्तान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और अमेरिका की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा है, उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल कहीं आतंकवादी वारदातों के लिए न हो। इसके लिए पाकिस्तान को तुरंत और ठोस कार्रवाई करनी होगी। भारत और अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्रियों की सोमवार को वाशिंगटन में हुई टू प्लस टू बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद पर पहले से चल रहे साझा सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर सहमति जताने के साथ ही पाकिस्तान में फल-फूल रहे आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्ब उल मुजाहिदीन के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की अपील भी की गई है।
बयान में सीमापार से हर तरह के आतंकवाद की भर्त्सना करते हुए मुंबई और पठानकोट हमले के दोषियों को सजा दिलाने में सहयोग करने की भी बात है। साफ है कि यहां भी पाकिस्तान पर निशाना साधा गया है। भारत और अमेरिका की तरफ से जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम लेना इसलिए महत्वपूर्ण है कि सितंबर, 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन की मुलाकात के बाद जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया था।
सोमवार को टू प्लस टू वार्ता से पहले मोदी और बाइडन की वर्चुअल बैठक हुई थी जिसमें दोनों तरफ के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री भी उपस्थित थे। सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अमेरिका के रक्षा मंत्री लायड आस्टिन के साथ अलग-अलग बैठकें भी हुई थीं। उक्त चारों बैठकों में यूक्रेन-रूस का विवाद काफी अहम रहा। इसके बावजूद आतंकवाद के मुद्दे को दोनों पक्ष प्राथमिकता से ले रहे हैं। दोनों देशों के गृह मंत्रालयों के बीच इस वर्ष होने वाली बैठक में सहयोग बढ़ाने को लेकर आगे विस्तार से विमर्श किया जाएगा।
आतंकवाद के खिलाफ भारत और अमेरिका के बीच कई स्तरों पर संपर्क कायम किया गया है। पाकिस्तान के लिए यह भी राहत की बात नहीं है कि भारत और अमेरिका ने पूरी दुनिया से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के नियमों को पूरी तरह लागू करने की अपील की है। अभी पाकिस्तान एफएटीएफ की निगरानी सूची में है।
असलियत में इस मंच पर पाकिस्तान को घेरने में अमेरिका ने भारत की काफी मदद की है। इसका नतीजा यह रहा कि पाकिस्तान में हाल के दिनों में कई कानून बनाए गए हैं जो आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने में सहायक साबित होंगे। यह भी सनद रहे कि प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री को सोमवार को जो बधाई संदेश भेजा, उसमें भी यह स्पष्ट किया कि उन्हें आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।